Theatre Age does it through stage performing – थिएटर एज ने किया रंगमंच के माध्यम से

मैंने उसके बारे में सुन रखा था. ज़ुल्फ़िकार ख़ान ने एक कार्य को अलग अंदाज़ में किया है. थिएटर एज चंडीगढ़ में नया नाम नहीं है. आप थिएटर एज के एक थ्रीव्हीलर को रद्दी पेपर और रद्दी सामान एकत्रित करते हुए देख सकते हैं. यह साधारण गतिविधि लगती है. परंतु यह साधारण नहीं है. इसका परिदृश्य बहुत बड़ा है और ऐसे क्षेत्र में है जहाँ जाने का साहस बहुत कम लोग करते हैं.
ज़ुल्फ़िकार ख़ान शाहाबाद, ज़िला हरदोई, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं जो अत्यंत ग़रीबी और बेरोज़गारी के लिए जाना जाता है. उनके अपने परिवार में पाँच भाई और एक बहन है. उन्होंने बचपन में देखा है कि सप्ताह में दो-तीन बार ही खाना बनता था. आगे चल कर परिवार की स्थिति बेहतर हुई.
वे चंडीगढ़ में अपने बड़े भाई से मिलने के लिए आए. तब तक वे स्नातक पास कर चुके थे. वे फिल्मों में कार्य करना चाहते थे. डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडियन थिएटर में प्रवेश के लिए पहली कोशिश की परंतु सफलता नहीं मिली. तब टी.वी. मैकेनिक का कार्य सीखा. बात नहीं बनी. टेलरिंग का कार्य सीखा, एक टी.वी. शॉप पर नौकरी की परंतु बात नहीं बनी. किसी के कहने पर पुनः डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडियन थिएटर में कोशिश की और बात बन गई. वहाँ से गोल्ड मेडलिस्ट बन कर निकले. परंतु यह जीवन संघर्ष की शुरूआत भर थी.
रंगमंच के क्षेत्र में प्रभावशाली लोग बहुत हिस्सा लेते हैं. ज़ुल्फ़िकार के एक नाटक की रिहर्सल के दौरान एक बच्चे को ऐसी जगह बिठाया गया जो छुपने की जगह जैसी गोलाकार थी. एक व्यक्ति आया और कहा कि इस बच्चे को यहाँ न रखिए, बाहर निकालिए. उसे पूछा गया कि आप कौन हैं तो उसने बताया कि वह बच्चे का बॉडीगार्ड था. ज़ुल्फ़िकार ने पहली बार सुना कि बच्चे का भी बॉडीगार्ड होता है. शाम को यूनीवर्सिटी आपने होस्टल लौट रहे थे तो रास्ते में कूड़े के एक बड़े कण्टेनर में कई बच्चों को अस्वस्थकर स्थितियों में कूड़ा बीनते हुए देखा. आपने भी देखा होगा.
ज़ुल्फ़िकार ने उन बच्चों को थिएटर में लाने की सोची. सैक्टर 25 में श्मशान घाट के पास पेड़ के नीचे साफ़ जगह बनाई गई और गानों की रिहर्सल शुरू हुई. अगले दिन वहाँ पहुँचे तो वहाँ लोगों ने नित्य कर्म किया हुआ था. सो दूसरे पेड़ के नीचे जगह साफ़ की गई. अगले दिन भी लोगों ने प्रमाणित कर दिया था कि नित्य कर्म के लिए साफ़ जगह होनी चाहिए. होस्टल के पास ही कार्य शुरू किया गया जो चल निकला.
अब उनका समूह स्वरूप ग्रहण करने लगा जो आगे चल कर एक ग़ैर-सरकारी संगठन बना जिस का नाम थिएटर एज रखा गया. ग़रीब बस्तियों में रहने वाले बच्चों के लिए कक्षाओं का प्रबंध किया गया. अपनी कमाई के लिए बच्चे बार-बार कक्षाएँ छोड़ कर भाग जाते. उन्हें बार-बार वापस लाया गया. ज़ुल्फ़िकार ख़ान आज इस ग़ैर-सरकारी संगठन के अध्यक्ष हैं. 

ज़ुल्फ़िकार ख़ान, अध्यक्ष, थिएटर एज
एक पत्रकार भाई ने उन्हें रद्दी एकत्र करके आय का स्रोत खड़ा करने का आइडिया दिया. पहले साइकिल पर रद्दी इकट्ठी की गई फिर साइकिलों पर. फिर स्कूटर खरीदा गया. उल्लेखनीय है कि इस कार्य के लिए सरकार से कोई मदद नहीं ली गई. एक समय आया जब भारतीय स्टेट बैंक की नज़र पड़ी और उसने एक थ्री व्हीलर ले कर दिया. थिएटर एज नुक्कड़ नाटकों से लेकर टैगोर थिएटर तक में अपने आयोजन करता है और कई सामाजिक सरोकारों से जुड़ा है. इसने ग़रीबी के हाशिए में पड़े 55 बच्चों के लिए प्रयास किया है. इनके द्वारा चलाए जा रहे स्कूल में बच्चों के भोजन से लेकर पढ़ाई तक की ज़रूरतें पूरी हो रही हैं. वे कंप्यूटर की भी ट्रेनिंग देते हैं. चंडीगढ़ के संभ्रांत परिवारों के लोग यहाँ बच्चों को कई विषय पढ़ाने के लिए अपना समय, धन और मुफ़्त सेवा दे रहे हैं.

डॉ. वीरेंद्र मेंहदीरत्ता एवं श्रीमती कांता मेंहदीरत्ता बच्चों के साथ
यदि आप चंडीगढ़ में हैं और घर का रद्दी सामान निकाल रहे हैं तो इस मोबाइल नंबर का प्रयोग कर सकते हैं. 9815145453  

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7 Responses to Theatre Age does it through stage performing – थिएटर एज ने किया रंगमंच के माध्यम से

  1. JHAROKHA says:

    Julfikar ji ka yah prayas bahut sarahaneeya hai.isakee jitanee tareef kee jay kam hai.meree hardik shubhkamnayen un tak pahunchayen.
    Poonam

  2. agma says:

    It astonishes to see someone doing that much and selflessly. Congrats to Zulfi and good wishes.

  3. Julfikar ji ka yah prayas bahut sarahaneeya hai.

  4. इस सुंदर नए चिट्ठे के साथ आपका ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

  5. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

  6. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    किसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्‍लाग के स्‍वामी अंकुर जी,
    हिन्‍दी टेक ब्‍लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।

    ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

    आप भी सादर आमंत्रित हैं,
    http://sanskrit-jeevan.blogspot.com/ पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
    प्रसार में अपना योगदान दें ।
    यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

    हमें ईमेल से संपर्क करें pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

    धन्‍यवाद

  7. Mr Khan

    App Ki is nirswarth Sewa ki. Har Bartiya Ka Salaam.

    Thanks,

    Tarsem Lal Bhagat

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