Monthly Archives: January 2011

There is lot in a name, dear brother – नाम में बहुत कुछ रखा है भाई साहब

समय बदल चुका है. मेघवंशी अब बच्चों के नाम नई परंपरा के अनुसार रखने लगे हैं. कभी-कभी बारू, थोड़ू, सोमी, वीरू जैसे बिगड़े हुए नाम मिलते हैं. जातिगत नाम लगाने की भी परंपरा है. मेघवाल, मेघवार, मेघ, आदि सुसंस्कृत नाम … Continue reading

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Lessening thinking is beneficial, but not religious

 (This article is from Church of the Churchless) Every day, in so many ways, our brains produce lots of thoughts. Estimates vary as to the average number. When I asked Google, widely disparate answers popped up. None seemed to be … Continue reading

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What happened to Bhakta Prahlada – मेघवंशी प्रह्लाद भक्त का क्या हुआ

‘भक्त’का मूल अर्थ है जो अलग हो चुका है. किससे अलग हुआ यह संदर्भ के अनुसार है. हिरण्यकश्यपु (असुर या अनार्य) के पुत्र प्रह्लाद को भक्त के तौर पर बहुत महिमा मंडित किया गया है. भारतीय पौराणिक कथाओं (Indian Mythology)में … Continue reading

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Kabir is deep rooted – मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे….मैं तो हूँ विश्वास में

मेघवंशी स्वयं को वृत्र या मेघ ऋषि का वंशज मानते हैं. मेघ ऋषि के बारे में प्रसिद्ध है कि कपड़ा बनाने की शुरूआत करने वाले मेघऋषि ही थे जैसा कि राजस्थान में माना जाता है और ‘मेघ चालीसा’ में लिखा … Continue reading

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Santhal (संथाल): The aboriginal tribe of India; they sacrificed 10000 lives for their independence.

The history of great Santhal (the aboriginal tribe of India) also finds its roots in Indus Valley Civilization. Their struggle and spirit to sacrifice for their freedom was punished jointly by  Britishers, Indian zamidars and moneylenders.  Their  yearn for independence … Continue reading

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Rashtriya Meghvansh Mahasabha….और राष्ट्रीय मेघवंश महासभा का कारवाँ निकल पड़ा

सर्वश्री योगेंद्र मकवाना, कैलाश मेघवाल और आर.पी. सिंह दर्शकों से भरा सभागार राष्ट्रीय मेघवंश महासभा, दिल्ली का एक विशाल सेमिनार 26 दिसंबर 2010 को मेघगंगा सामुदायिक भवन, बनीपार्क, जयपुर में संपन्न हुआ जिसमें राजस्थान के अनेक जिलों से सैंकड़ों की … Continue reading

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Personal Capability, Development – Dalit Leadership

“व्यक्तिगत योग्यता बढ़ाने व गुणवत्ता पूर्ण कार्यशैली विकसित करने के प्रति कोई उत्साह दलित नेतृत्व द्वारा नहीं जगाया जाता. एक खास किस्म की आक्रामकता बनाये रखने और वोट बैंक के रूप में संगठित करने के साथ ही कर्तव्यों की इतिश्री … Continue reading

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