Bhagat Mahasabha held National Megh Confefence – भगत महासभा ने राष्ट्रीय मेघ सम्मेलन का आयोजन किया

भगत महासभा ने एक राष्ट्रीय मेघ सम्मेलन 10-04-2011 को रॉयल पैलेस, जालंधर में प्रातः 11.00 बजे आयोजित किया. भगत महासभा द्वारा मेघ समुदाय में एकता बढ़ाने के प्रयासों के तहत यह विभिन्न राज्यों में लगभग एक वर्ष में किए गए समारोहों में दसवाँ था जो महासभा की सक्रियता दर्शाता है. मैं स्वयं इस कार्यक्रम में उपस्थित था अतः अधिक न लिख कर इस कार्यक्रम के फोटो दे रहा हूँ जो इसे पर्याप्त रूप से दर्शा रहे हैं. सुनने में आया है कि मेघ समुदाय का ऐसा कार्यक्रम जालंधर में बहुत देर के बाद हुआ है और इससे समुदाय में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं. चलो अच्छा हुआ. और भी अच्छा होगा यदि सामान्यजन के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण का भी प्रबंध हो जाए जिसकी कमी की बात सभी वक्ताओं ने की. एक कारण मेरी व्यक्तिगत खुशी का भी है. एक आलेख में मैंने कबीर के ज्ञानदिवस को सुहावना मौसम देने के बारे में लिखा था जिसे आप यहाँ (मार्च के आलेखों में) पढ़ सकते हैं. इस समारोह के दौरान कई वक्ताओं ने इस मुद्दे को उठाया. आस बँधी है कि इस बारे में समुदाय शीघ्र ही कोई निर्णय लेगा. इस अवसर पर श्री कीमती लाल भगत को मैंने पहली बार सुना. रोमी रंजन (Romy Ranjan) के गीत सुने थे उसका भाषण पहली बार सुना. आशुकोटि (Ashu Koti) के लाइव गीत भा गए.

 

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Born on January, 13, 1951. I love my community and country.
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5 Responses to Bhagat Mahasabha held National Megh Confefence – भगत महासभा ने राष्ट्रीय मेघ सम्मेलन का आयोजन किया

  1. Bhushan says:

    सभी को बहुत-बहुत बधाई.

  2. Rattan Gottra. says:

    It has been given in press-note that there should be coordination among the different organisations. That is appreciable. However, mojority of the NGOs fail in this respect, because of infiltration of politicians and fanatic religious activists into them.

  3. Rattan Gottra. says:

    DR. AMBEDKAR discovered that equality of all in the eyes of 'God' had practically proved to be ineffective. Because, no amount of 'Bhakti' could improve the lot of the poor masses. Therefore, he gave all the Indians (particularly the 'Dalits') the concept of liberty, equality, fraternity, and justice for all in different spheres of life.

  4. Bhushan says:

    @ Rattan Gottra. I agree with you Gottra Ji.

  5. Rattan Gottra. says:

    Thanks Bhushan Ji.

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