दिव्या नाम है साहस का – (The ZEAL)

डॉ दिव्या श्रीवास्तव
क्या आप शर्माते हैं? क्या आपमें लज्जा है? क्या आप इनके कारण सच नहीं बोल पाते? क्या आप लज्जा, शर्म और भय में सही अंतर कर पाते हैं? क्या आप जानते हैं कि भय से बढ़ कर कोई रोग नहीं है?
भय से मुक्ति का एक ही रास्ता है – साहस. ऐसा साहस जिसके पीछे ज्ञान और विवेक हो. मेघवंशी समुदाय की महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए यह साहस बहुत ज़रूरी है. इसके लिए किसी हिंसक तौर-तरीके अपनाने की आवश्यकता नहीं होती. केवल साहस और सामान्य विवेक से परिस्थितियों पर विजय पाई जाती है.
दिव्या का एक आलेख यहाँ रिकार्ड कर रहा हूँ. जब मैंने इसे पढ़ा तब तक इस पर 102 टिप्पणियाँ आ चुकी थीं. निजी और सामाजिक दृष्टि से उनके आलेख फ़ौलादी हैं. इन के वाक्यों की पैनी धार देखने लायक होती है. इनमें ऐसे punch रहते हैं जो कभी खाली नहीं जाते. मैं डॉ दिव्या श्रीवास्तव को हिंदी ब्लॉगर्स में साहसी और बिंदास ब्लॉगर मानता हूँ. 
यह आलेख हिंदी ब्लॉग जगत की लौह महिला डॉ दिव्या श्रीवास्तव ने लिखा है. सावधान हो कर पढ़ें.
स्त्री उपभोग की वस्तु नहीं है — Do not treat her like commodity.”
झगडा मत करना
झूठ मत बोलना
अहंकार मत रखना
विनम्रता का व्यवहार रखना
मधुर वचन बोलना और अहिंसा का पालन करना आदि आदि …
– ऐसे बहुतेरे उपदेश/संस्कार दिए जाते हैं, लेकिन कोई ये नहीं बताता की जब किसी स्त्री के साथ अभद्र या अश्लील व्यवहार तो ऐसी स्थिति में उसे क्या करना चाहिए?
– क्या चुप रहना चाहिए?
– क्या लज्जावान सुशीला बनकर सब कुछ सहना चाहिए?
– या अपने आप में तिरस्कार और अपमान सहकर घुटते रहना चाहिए?
– या फिर अदालतों में कभी न मिलने वाले न्याय के लिए लड़ना चाहिए?
– या फिर पुरुष को श्रेष्ठ समझकर अपनी नियति को स्वीकार कर लेना चाहिए?
– या फिर हिम्मत और साहस से काम लेकर सामने वाले को उसकी गलती का एहसास करा देना चाहिए?
– या फिर बिना डरे, बिना रोये, बिना स्वयं को कमतर समझे साहस के साथ, उस जड़ता प्राप्त, अज्ञानी, जाहिल एवं दुष्ट पुरुष को उसके कृत्यों की सजा दे देनी चाहिए, जिससे भविष्य में वो ऐसी हरकतें न करे जिससे किसी स्त्री के सम्मान और शील को चोट पहुंचे?
– क्या उस महिला की तरह, जिसे विधायक ने त्रस्त कर रखा था, खून कर देना चाहिए?
– या फिर राजेश गुलाटी जैसे पुरुषों द्वारा शरीर के 72 टुकड़े किये जाने का इंतज़ार करना चाहिए?
– या फिर अरुणा शानबाग की तरह बलात्कार के बाद 37 साल तक कोमा में रहकर बलात्कार से भी बदतर जिंदगी जिया जाए ?
– या फिर निशाप्रिया भाटिया की तरह की तरह न्याय व्यवस्था के हाथ का खिलौना बन कर तिल-तिल घुटना चाहिए?
– या फिर मनु हत्या काण्ड या राठोर काण्ड की तरह पीडिता को आत्महत्या कर लेनी चाहिए?
– क्या “शठे शाठ्ये समाचरेत्” का विकल्प नहीं अपनाना चाहिए जब नपुंसक हो रही व्यवस्था, स्त्री को सुरक्षा नहीं प्रदान कर सकती है तो?
– क्या बलात्कारी को मौत के घाट नहीं उतार देना चाहिए? जब अदालतों के चक्कर ही लगाने हों तो पीडिता बनकर क्यूँ? क्यूँ न स्वयं ही सजा दे दो फिर मांगने दो दुर्जनों को न्याय की भीख अदालतों में.
– क्या स्त्री को उपभोग की वस्तु समझने वाले पुरुषों को उनका सही स्थान नहीं बता देना चाहिए?
– सेक्स के भूखे इन नामर्दों के शिश्न काटकर इनके गले में लटका देना चाहिए.
आज घरों में, ऑफिसों में, अस्पतालों में बस में, रेल में हर जगह स्त्री का शोषण हो रहा है. छोटी- छोटी बच्चियों को भी ये दरिन्दे नहीं बख्श रहे. क्या स्त्रियाँ इस उम्मीद में हैं कोई राजकुमार सफ़ेद घोड़े पर आकर उनकी रक्षा करेगा? समय आ गया है अपनी रक्षा स्वयं करने का. मत देखो उम्मीद भरी आखों से किसी की ओर. कोई नहीं आएगा तुम्हारे अंतर्मन को समझने, तुम्हारे शील को बचाने अथवा तुम्हारे सम्मान की रक्षा करने.
एक सत्य घटना का उल्लेख कर रही हूँ, शायद किसी स्त्री को हिम्मत मिले —
उस समय मैं 12 वीं कक्षा की छात्रा थी, एक बार मैं एक जाने-माने नेत्र-विशेषज्ञ के पास, उनके आवास स्थित क्लिनिक पर विज़न-टेस्ट के लिए गयी. उन्हें देखकर उनकी योग्यता से अभिभूत होकर किसी के भी मन में उनके लिए त्वरित सम्मान उत्पन्न हो जाए, ऐसा था उनका बाहरी व्यक्तित्व. लेकिन असली चरित्र कैसा था?
……कक्ष में करीब 20 मरीज अपनी बारी आने के इंतज़ार में बैठे थे. डॉ साहब ने लेंस बदलकर जाँच करके चश्मे का नंबर देने के बजाये retinoscope द्वारा एक अनावश्यक जाँच की (एक ऐसा यंत्र जिसके द्वारा जाँच करते समय चिकित्सक एवं मरीज के चेहरों के मध्य बमुश्किल 1-2 सेंटीमीटर की दूरी रहती है)
फिर उन्होंने अपनी कुर्सी पर बैठकर कागज़ पर लिखना शुरू किया, चूँकि कक्ष में बैठे मरीज़ बहुत करीब थे, और कोई भी संवाद सभी को श्रव्य था इसलिए वे लिखकर संवाद कर रहे थे, जिसे केवल मैं पढ़ सकती थी. उसमें जो लिखा था उसे पढ़कर किसी का भी मन करता कि इनको दो थप्पड़ मारकर इनका चरित्र सबके सामने ला दे.
लेकिन स्त्री की लज्जा, उसकी विवशता, उसे बहुत मजबूर करती है ज़रा सी भी उफ़ तक करने को. फिर मैंने क्या किया? अपना परचा लिया और बहुत सफाई से उस कागज़ को भी उठा लिया जिसपर उनकी कारगुजारी की दास्तान उन्हीं की लिखाई में लिखी हुई थी.
वहां से बाहर निकलते ही, बिना विलम्ब किये उनके आवास के मुख्य द्वार पर जाकर घंटी बजायी. उनकी गरिमामय 50 वर्षीय पत्नी बाहर आयीं. मैंने पूछा आप इस लिखाई को पहचानती हैं? उन्होंने कहा हाँ ये तो डॉक्टर साहब की लिखाई लगती है. मैंने कहा, “उन्हीं की है, आराम से पढियेगा क्या-क्या लिखा है और रात का भोजन परोसते समय ये कागज़ का टुकड़ा अपने स्वामी को देना मत भूलियेगा”.
कहकर मैं वहां से चल दी. बाहर मेरे भैया हतप्रभ खड़े थे, वो आज भी नहीं जानते कि क्या हुआ था. हम घर वापस आ गए, फिर कभी वहाँ जाना नहीं हुआ. नहीं जानती उनकी पत्नी ने क्या किया. वो चिकित्सक सुधरे अथवा नहीं, लेकिन मुझे पूरा संतोष था कि मैंने उन्हें समय रहते सही पाठ पढ़ाया है.
Link to her blog   –  ‘Zeal

मूल आलेख

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21 Responses to दिव्या नाम है साहस का – (The ZEAL)

  1. Anonymous says:

    Dr Divya, nice informative and philosophical post on Meghnet,The Mamai said in his Vedas:-
    Namna, khamna,Bahot guna,Jenji mukh me mithi vani,
    mankhe me manza DEV napna, nahi koy DEV ji khani,
    Translation:- person who are polite,sweet speech(right speech)and full of merit and virtue is the GOD,,There is no query or mine of Gods you cannot dig out God in query or mine.,,
    From..Nitin….

  2. GL Bhagat says:

    Dr. you have to go a long way of life.Such rascals are everywhere.As long as you are mentally strong, no one can dare to say a word.last time i named a few who are self styled owners of their own personality. most of the the living acquires the status of an image of the same by maintaining their inner strength.

    keep on educating and Mr. Bhushan has already stated it nice informative and philosophical post. nice.

  3. ZEAL says:

    .

    आदरणीय भूषण जी ,

    इस लेख को यहाँ प्रस्तुत करके आपने ये सिद्ध कर दिया की एक सकारात्मक मुहीम में आप हमारे साथ हैं । जो स्त्रियाँ कमज़ोर हैं, अशिक्षित हैं , उनके लिए मज़बूत वर्ग की स्त्रियों को ढाल बनकर आना चाहिए। और सभी स्त्रियों के साथ यदि समाज के पढ़े-लिखे , जागरूक पुरुष भी कंधे से कन्धा मिलाकर साथ दें तो हमें अपने प्रयासों में सफलता अवश्य मिलेगी ।

    Unity is strength ! ये एकता सबसे पहले स्त्री और पुरुष के बीच आनी जरूरी है । एक-दुसरे के लिए हमारे दिलों में सम्मान के भाव होने चाहिए ।

    मेरे कुछ लेखों पर जो स्त्रियों में जागरूकता लाने लिए होते हैं , उस पर बहुत से पुरुषों के सकारात्मक विचार रहते हैं जिससे विषय को मजबूती मिलती है और लेखिका को हौसला ।

    .

  4. ZEAL says:

    .

    आपने लिखा – ” दिव्या नाम है साहस का ” …..ये साहस मुझे आप जैसे स्नेहिल , सुलझी दृष्टि रखने वाले , नीर-क्षीर विभेदक बुद्धि रखने वाले और कमज़ोर वर्ग ( गरीब , दलित और स्त्री ) के साथ सहानुभूति रखने वालों से मिलता है ।

    GL Bhagat जी और आप जैसे व्यक्तित्वों के लिए ह्रदय में बेहद सम्मान है ।

    इस लेख को अपने ब्लॉग पर स्थान देने के लिए और मेरे सदप्रयासों में सहयोग देने के लिए , ह्रदय से आपका आभार ।

    .

  5. Bhushan ji,
    This is wonderful news. I am so thrilled to see this about our Dear Dr. Divya Srivastav and her articles being appreciated worldwide on the blogworld, specially the tone of recognition of her YEOMEN service to women in particular and human kind in general is highly laudable, indeed. KUDOS!. Much appreciated that you have highlighted this here as well.
    Dr. Divya definitely deserves many more of such accolades and “This is DEFINITELY a great way to encourage her in her mission, for which she has chosen to give her mind, heart and soul”

    When I was in school, back home in India, my Physics professor used to say “If one uses just the Mind, one can be called intelligent, if Mind and heart are used the person would be extra-ordinarily intelligent/Brilliant, but if one uses the mind, heart and soul, the person would be called a genius” — And Dr. Divya uses all three!
    Many regards and gratitude for publishing this on your Blog site.
    Jagan Ramamoorthy
    Los Angeles, CA. USA

  6. Bhushan says:

    @ Dr. Nitin
    Thanks for the visit and giving your views.

  7. Her crusade for empowerment of women is applaudable.

  8. Pallavi says:

    बहुत अच्छी पोस्ट प्रस्तुत की है आप ने… मुझे पूरी उम्मीद है की आप की इस पोस्ट से नारी जाती को बहुत बल मिलेगा , बहुत अच्छा लगा आप की यह पोस्ट पढ़ कर हम आप के साथ हैं और केवल में ही नहीं आप का यह लेख पढ़कर हर स्त्री आप की कही गई बातों से सहमत होगी में आप के विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ… आप की अगली पोस्ट का इंतज़ार रहेगा
    सादर
    पल्लवी

  9. Navin Bhoiya says:

    Very good post by Sister Dr. Divya. We are proud of her for expressing bold and effective views on the crucial subject of women empowerment.

  10. डॉ. दिव्या श्रीवास्तव जी के इस आलेख को मैं ज़ील पर पढ़ चुका हूं। सामाजिक जागरूकता प्रसारित करने के संदर्भ में उनके आलेख बहुत महत्वपूर्ण हैं।
    आलेख को यहां प्रस्तुत करने के लिए आपका आभार।

  11. डॉ. दिव्या श्रीवास्तव जी के इस आलेख को मैं ज़ील पर पढ़ चुका हूं और अपनी टिप्पणी भी कर चुका हूं। आपने ब्लॉग अपने पर देकर दुबारा टिप्पणी देने का आग्रह किया है। डॉ. दिव्या के आलेख पर ज़्यादा टिप्पणियाँ पुरुषों ने ही की है और डॉ. दिव्या का आह्वान पुरुषों की विगलित मानसिकता से ही लड़ाई का है। क्या ऐसा लगता है कि किसी लेख पर टिप्पणी मात्र कर देने से समस्या का हल हो जाएगा। आज अन्ना के आंदोलन का ज़बानी समर्थन एक फ़ैशन बन गया है। ऐसे ही मात्र टिप्पणी कर देने से काम नहीं चलेगा। हमें ऐसी पोस्टों के माध्यम से संकल्प लेने का अनुरोध किया जाना चाहिए कि अपने आस पास ऐसी घटना को प्रश्रय देने की न तो किसी घटना में सहभागी होंगे और न ही मूक दर्शक बनेंगे। साथ ही समाज में किसी दुर्घना से प्रभावित होकर प्रतिशोध की भावना से ग्रस्त महिला सदैव इस फेर में पड़ जाती हैं कि उन्हें सर्वत्र बुरा ही नज़र आने लगता है। अतः विवेक पूर्ण व्यवहार करते हुए इस बुराई से लड़ने का साहस हर महिला में जागृत करने की अच्छी शुरुआत होनी चाहिए। डॉ. विद्या हमेशा ही ऐसे ही मुद्दे उठाती हैं जिन पर विचार मंथन के लिए अवसर मिलता है। शुभकामना।

  12. बहुत अच्छी पोस्ट प्रस्तुत की है|धन्यवाद|

  13. Bhushan says:

    @ जीएल जी. आपको धन्यवाद.
    @ दिव्या जी. मैं मानता हूँ कि मेघनेट एक नॉन-एंटरटेनिंग ब्लॉग है. दूसरे, मेरे बहुत कम पाठक टिप्पणी करना जानते हैं परंतु कइयों ने फोन पर प्रतिक्रियाएँ दी हैं जो बहुत सकारात्मक हैं.
    आपको धन्यवाद और इतनी बढ़िया पोस्ट के लिए बधाई.

  14. Bhushan says:

    @ Respected Jagan Ramamoorthy Ji, your comment is important because you know about her mission.

    '…..but if one uses the mind, heart and soul, the person would be called a genius” — And Dr. Divya uses all three!'

    I agree with you.

  15. Bhushan says:

    @ Amit ji
    @ Pallavi ji
    @ Navin ji

    आपकी भावनाएँ अमूल्य हैं. आपको धन्यवाद.

  16. Apanatva says:

    The meaning of her name explains her personality .

  17. Bhushan says:

    @ Bhagat Kabir ji Maharaj
    @ Mahendra Verma ji
    @ Dal Singar ji
    @ Patali the village
    आपने आकर मान बढ़ाया है. आपका आभार.

  18. Bhushan says:

    @ Apnatva,
    आपका कहना सही है और आपकी भावनाएँ उदार हैं. आपको कोटिशः धन्यवाद.

  19. आपको धन्यवाद और इतनी बढ़िया पोस्ट के लिए बधाई.

    http://mankiduniya.blogspot.com/2011/08/blog-post_28.html

    http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/BUNIYAD/

  20. Anonymous says:

    thanks dear Bhushanji for good informative post of Dr Divya… from Dr Nitin Jamnagar

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