Kabir and Kumar Gandharv – कबीर और कुमार गंधर्व

कबीर

कुमार गंधर्व

27-01-2011 को श्री कामता नाथ, राष्ट्रीय महामंत्री, संस्कार भारती हमारे घर पधारे. उनके साथ सैभाग्यवर्धन वृहस्पति जी भी थे जो शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में जाना-माना नाम है. संगीत और संस्कारों पर गंभीर बातचीत हुई. कुमार गंधर्व की भी बात चली. मैंने सुना था कि कुमार गंधर्व एक फेफड़ा खो चुके थे. उनकी गायन शैली से भी लगता था कि वे लंबी तान नहीं ले पाते थे. उक्त बातचीत में वृहस्पति जी ने बताया कि अपनी जीवनी में कुमार गंधर्व ने इस बात को नकारा है कि उनकी शैली के पीछे उनके एक फेफड़े की कमी रही है. उनके दोनों फेफड़े ठीक थे.


कुमार गंधर्व बचपन में गायकी की ओर आए और अपनी शैली-स्वर से संगीत गुरुओं को प्रभावित किया और उनसे कुमार गंधर्व का नाम और संस्कार पाया. इस नाम में उत्तम स्वर-शैली का संस्कार है. उन्होंने संगीत पर अपनी अमिट छाप छोड़ी.

मैं समझता हूँ कि उन्होंने लोकगीतों और शास्त्रीय रागों का जो मिला-जुला रूप अपनी गायकी से दिया है वह आम आदमी पर गहरा प्रभाव छोड़ता है. एक और बात मुझे शिद्दत से महसूस होती है कि कबीर को जिन गिने-चुने गायकों ने सलीके, तरीके और अदब से गाया है उनमें कुमार गंधर्व हैं. उनकी शैली कबीर के बहुत अनुकूल बैठी है.

उनका गाया हुआ यह भजन तन्मयता की पराकाष्ठा है.

18 comments:

मनोज कुमार said…

बहुत सुंदर प्रस्तुति। कुमार गंदर्भ जी, उनकी गायन शैली और योगदान के बारे में जानना बहुत ही अच्छा लगा।

प्रवीण पाण्डेय said…

मन्त्रमुग्ध हो सुन गया।

Sunil Kumar said…

कुमार गंदर्भ जी, उनकी गायन शैली के बारे में जानना बहुत ही अच्छा लगा।

Minakshi Pant said…

जानकारी देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! गाना सुनकर अच्छा लगा !

mahendra verma said…

कुमार गंधर्व के भजन मुझे बेहद प्रिय हैं। उनकी गायकी में मालवा के लोकगीतों की छटा दिखती है। उनकी ख़ासियत यह थी कि वे अपने गायन में तानपूरे और तबले के अतिरिक्त किसी और सहायक वाद्ययंत्र का प्रयोग नहीं करते थे। ‘सुनता है गुरु ज्ञानी‘ को कई बार सुना हूं, लेकिन आपकी प्रस्तुति के साथ सुनने में एक अलग तरह का आनंद आया। इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, भूषण जी।

Bhushan said…

@ मनोज जी, @ प्रवीण जी, @ सुनील जी, @ मीनाक्षी जी, आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद. @ महेंद्र जी, आपके द्वारा दी गई जानकारी से आलेख को बल मिला है. मैंने कुमार गंधर्व को जीवन में दो बार सुना है और उनकी शैली का कायल हूँ.

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said…

bhushan ji.. kumar Gandharv ji ke baare me bahut achhi jankari dee aapne.. is jaankari se abhibhut hoon ..aapka dhanyvaad.

Rajesh Kumar ‘Nachiketa’ said…

मुझे रागों की पहचान नहीं मगर सुन के अच्छा लगा….

Indranil Bhattacharjee ………”सैल” said…

इतनी सुन्दर जानकारी और ऐसे बेहतरीन संगीत साझा करने के लिए धन्यवाद ! कुमार गन्धर्व के गायन सुनते सुनते मन कहीं खो जाता है …

डॉ. हरदीप संधु said…

भूषण जी, जानकारी देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! कई बार सुना …‘सुनता है गुरु ज्ञानी‘ को !

Bhushan said…

@ डॉ.नूतन जी @ डॉ. हरदीप जी @ राजेश जी @ इंद्रनील जी आपको ‘सुनता है गुरु ज्ञानी‘ और कुमार गंधर्व से संबंधित जानकारी (सीमित ही सही) अच्छी लगी इसके लिए आभार.

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH said…

बाऊ जी, नमस्ते! ज्ञानवर्धक. पर हम कभी नुसरत के आगे बढ़ ही नहीं पाए… आशीष

दिगम्बर नासवा said…

कुमार गंधर्व एक जाना माना नाम है संगीत और गायन के क्षेत्र में … अच्छा लगा उनके बारे में जान कर …

Patali-The-Village said…

कुमार गंदर्भ जी, उनकी गायन शैली के बारे में जानना बहुत ही अच्छा लगा।

Bhushan said…

@ आशीष प्यारे @ दिगंबर जी @ पताली जी आप सभी का पधारने के लिए धन्यवाद.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said…

आदरणीय भूषण जी सादर अभिवादन ! कबीर और कुमार गंधर्व लेख रुचिकर लगा । … लेकिन पंडित कुमार गंधर्व ने मीरा गोरखनाथ आदि को भी उसी तन्मयता के साथ डूब कर गाया है । मेरे पास उनका भजन और शास्त्रीय संगीत का अच्छा संग्रह है … उनकी हर प्रस्तुति सुनने योग्य है । उनकी गायकी के सम्मोहन से कोई भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता । आपको अच्छी पोस्ट के लिए बधाई है , …और आभार भी । लेकिन बहुत दुःख हुआ कि अनेक ब्लॉगर बंधु आदरणीय कुमार गंधर्व जी का नाम भी सही तरह से नहीं पहचानते … बसंत पंचमी सहित बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं ! – राजेन्द्र स्वर्णकार

सतीश सक्सेना said…

बहुत बढ़िया जानकारी दी आपने आभार एवं शुभकामनायें !

Bhushan said…

@ राजेंद्र जी @ सतीश जी आप दोनों को पधारने के लिए धन्यवाद.
Advertisements

About meghnet

Born on January, 13, 1951. I love my community and country.
This entry was posted in रचनात्मक. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s