A truth about peacock and my wild imagination – मोर का सच और मेरी जंगली कल्पना

After retirement many memories return to us which we would not have consciously remembered otherwise. Few days back, same sort of memory regarding peacock, our national bird, occurred to me, a memory I want to share.

In 1965, we lived in Sirsa in Haryana State. Our residence was located in the office of Public Works Department which was in front of Bansal Theatre and had a very large courtyard. My father worked as Sub Divisional Engineer there. There was a Church at the rear of the office building containing big number of trees and many peacocks.

The same year there was Indo-Pak war. In accordance with guidance received from news papers, we had dug trenches in the courtyard and moved in there whenever there was sound of sirens. One day we heard big blasts. Next day there was news regarding bombing In Kutte Vadd village, 14 kilometers away from Sirsa, where two buffaloes reportedly died.

Families of other staff stationed there had a unique experience of peacock making sound much before the sirens did. One day my father woke up after hearing the sound of peacocks and smilingly said, “Let us go in trenches.” In fact we were all awake due to the sound of peacocks. Sirens sounded later.

The ‘Nationalism’ (instinct) of our national bird is noticeable. God forbid there should be war but we must study this unique feature of peacocks.
 Vigilant sentry सजग प्रहरी

रिटायर होने के बाद कई बार ऐसी बातें याद आती हैं जिन्हें अन्यथा हमने कभी मुड़ कर याद नहीं किया होगा. राष्ट्रीय पक्षी मोर की एक ऐसी स्मृति मैं आपसे साझा करना चाहता हूँ.

वर्ष 1965 में हम हरियाणा के सिरसा (तब एक कस्बा) में रहते थे. हमारा घर बंसल थिएटर के सामने पीडब्ल्यूडी के कार्यालय के बड़े से प्रांगण था. यहाँ पिता जी एस.डी.ई. थे. घर के पीछे चर्च था जहाँ खूब पेड़ थे और बहुत से मोर.
उसी वर्ष भारक-पाक युद्ध हुआ. समाचार-पत्रों में दिए मार्गदर्शन के अनुसार हमने प्रांगण में खाइयाँ (trenches) खोद लीं ताकि सायरन की आवाज़ आते ही उनमें शरण ली जाए. उन दिनों कई बार हमारे क्षेत्र में सायरन बजा और एक दिन तो बमों के फटने की भयंकर आवाज़ भी आई. अगले दिन पता चला कि सिरसा से लगभग 14 किलोमीटर दूर कुत्ते वड्ड गाँव में दो भैंसें उस बमबारी में मारी गईं.
हमारे वाले प्रांगण में रहने वालों ने विशेष बात यह नोटिस की कि मोरों की आवाज़ें सायरन से पहले ही शुरू हो जाती थीं. वहाँ तैनात अन्य स्टाफ़ के परिवारों का यही अनुभव था. एक दिन मोरों की आवाज़ सुन कर पिता जी ने नींद टूटने पर मुस्कराते हुए कहा, चलो भई ट्रेंच में. उससे पहले हम सभी की नींद मोरों की आवाज़ से टूट चुकी हुई थी. सायरन उसके बाद बजा.
हमारे राष्ट्रीय पक्षी की राष्ट्रीयता (instinct) ध्यान देने योग्य है. ईश्वर न करे कि कहीं युद्ध हो परंतु मोरों की इस विशेषता पर ग़ौर करना चाहिए.
 Radar dances in the woods जंगल में राडार नाचा किसने देखा 
   May be peacocks have very sensitive ear and crest शायद मोर के कान और कलगी अति संवेदनशील हैं

Advertisements

About meghnet

Born on January, 13, 1951. I love my community and country.
This entry was posted in रचनात्मक, Peacock. Bookmark the permalink.

20 Responses to A truth about peacock and my wild imagination – मोर का सच और मेरी जंगली कल्पना

  1. Vivek Jain says:

    बहुत खूबसूरत प्रस्तुति

    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

  2. वाकई मोर इतने काम के है, जो सायरन से भी तेज है,

  3. ये तो आपने बिल्कुल अनोक्षी बात बताई, भूषण जी।
    प्राणी विज्ञानियों के लिए यह शोध का विषय है।

  4. Bahut rachak jankari di hai aap ne .

    Peacock has an ear-splitting screech, this makes it an excellent guard animal.

    Hardeep

  5. जंगल में राडार नाचा किसने देखा

    वाह भूषण जी, यह तो आपने बिलकुल अनोखी और बेहतरीन बात बताई है … इस बात पे तो शोध होने चाहिए …

  6. Jyoti Mishra says:

    Peacock is our national animal…. hez unique in his own way.
    These days we only get to see them in zoo, you are so lucky to see them so close.

  7. बिलकुल नई और बहुत लाभदायक जानकारी

  8. बिलकुल सही बात कही आपने ….मोर वास्तव में आनेवाले खतरों को पहले ही भाँप लेता है

  9. ਬਹੁਤ ਹੀ ਰੌਚਕ ਜਾਣਕਾਰੀ…
    ਮੋਰ ਤੋਂ ਇੱਕ ਚੁਟਕਲਾ ਯਾਦ ਆ ਗਿਆ…
    …ਵਿਦੇਸ਼ 'ਚ ਬੱਸ ਚੜ੍ਹਨ ਲੱਗਿਆਂ ਕੰਡਕਟਰ ਨੇ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਕਿਹਾ..” ਨੋ ਮੋਰ..” ਅਗੋਂ ਓਹ ਕਹਿੰਦਾ,” ਮੇਰੀ ਮੋਰਨੀ ਤਾਂ ਚੜ੍ਹ ਗਈ…ਫੇਰ ਮੋਰ ਕਿਵੇਂ ਨਾ ਚੜ੍ਹ”
    ਹਰਦੀਪ

  10. ZEAL says:

    A beautiful post on our National bird. Thanks Bhushan ji.

  11. Pallavi says:

    मोर की अति सुंदर तसवीरों के साथ एक बहुत ही रोचक एवं जानकारी वरधक पोस्ट क्यूंकि इस से पहले हमे नहीं मालूम था की मोर के कान एवं कलगी इतनी सावदेन शील होती है बहुत-बहुत धन्यवाद…

  12. सदा says:

    जंगल में राडार नाचा किसने देखा
    वाह …बहुत खूब कहा है आपने ।

  13. मोरों की इस विशेषता की जानकारी नहीं थी. वाकई यह शोध का विषय है. वैसे उनकी आवाज़ भी सायरन से कम नहीं होती. सालों पहले मोर पालने के चक्कर में बीजापुर (बस्तर) के जंगल से उनके अंडे का जुगाड़ किया था परन्तु प्रयोग असफल रहा.

  14. Bhushan says:

    भूषण जी,
    ख़ूबसूरत और मनमोहक तस्वीरें! मोर को आपने इतने नजदीक से देखा ये तो बड़े सौभाग्य की बात है! बहुत सुन्दर और लाजवाब पोस्ट! बेहतरीन प्रस्तुती!
    उर्मी
    (Urmi Chakraborty)(31-05-2011 को ईमेल से प्राप्त टिप्पणी)

  15. बहुत ही अच्छा पोस्ट है आपका जी !मेरे ब्लॉग पर जरुर आए ! आपका दिन शुब हो !
    Download Free Music + Lyrics – BollyWood Blaast
    Shayari Dil Se

  16. मोर के बारे में ये जानकारी पहले कभी नहीं पढ़ी थी…शुक्रिया आपका.

    नीरज

  17. मोर के बारे में इतनी विस्तृत जानकारी पहले कभी नहीं पढ़ी और बहुत ही जानकारीपूर्ण आलेख और बेहद मनमोहक तस्वीरें

    शुक्रिया आपका,

  18. S P Singh says:

    शुक्रिया आपका

  19. Bhushan says:

    *विवेक
    *संदीप
    *महेंद्र जी
    *हरदीप जी
    *सैल
    *ज्योति
    *कुँवर कुसुमेश जी
    आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया.

  20. Bhushan says:

    *सुरेंद्र जी
    *दिव्या जा
    *पल्लवी जी
    *सदा
    *सुब्रमणियन जी
    *उर्मी
    *मनप्रीत
    *नीरज जी
    *राजपुरोहित
    *ए.पी. सिंह
    आप सभी का आभार

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s