Kapalbhati to remove corruption – भ्रष्टाचार निवारक कपालभाती

मुफ़्त सरदर्द ले लिया. योग से राजनीतिक डिनर तक का सफ़र देखने लायक था. पता नहीं नटखट सिब्बी कहाँ से आए और डाइनिंग टेबल का पाया खींच लिया. ये लंबी साँस खींच कर दस फीट नीचे कूदेसत्याग्रह का मार्ग वाया हरिद्वार कर दिया गया.

भगवा पहन कर राजनीति के गाँव-गली में घुसने का अर्थ है किसी राजनीतिज्ञ के हल में जुत जाना. बेहतर होता है सत्ता के गलियारे से राइट टर्न ले कर भगवा संकल्प सहित निकल जाना.

ग़लत समय चुना योगा सर जी. इधर प्रणव के लिए कुर्सी पोंछीबुहारी जा रही है और उधर भ्रष्टाचार निवारक कपालभाती मैदान में आ गई और साथ में लाई अशांति का डर. जनता भ्रष्टाचार को राम की लीला मानती है. हर तरह के छोटेबड़े घोटाले के बाद सुखासन में बैठ कर ठंडा रेचक करती है. मन की शांति भी कोई चीज़ है भई.

आखिर में एक सूत्र स्मरण शक्ति को समर्पित है कि यदि योग राजनीति के पीछे चलता है तो ठीक है (यह अनुलोम हुआ), यदि आगे चलता है तो नीति विरुद्ध है, धृष्ट है (यह विलोम है). हमेशा धृतराष्ट्रों के पीछे चलें.

मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि…..”….अब कोई प्रतिज्ञा न करें क्योंकि कृष्ण ने प्रतिज्ञाएँ करने के प्रति पांडवों को चेतावनी दी थी

विलोम आपके लिए निर्दिष्ट नहीं है. हमारी शुभकामनाएँ.

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25 Responses to Kapalbhati to remove corruption – भ्रष्टाचार निवारक कपालभाती

  1. आपकी बात से सहमत हूँ।

  2. Vivek Jain says:

    बहुत बढ़िया,रोचक ढंग से सही बात कही है,

    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

  3. भ्रष्टाचार निवारक कपालभाती.

    बहुत रोचक बात.

  4. बहुत खूब …सामायिक एवं रोचक !
    शुभकामनायें आपको !

  5. Bhushan says:

    This comment has been sent by Pallavi Saxena through email

    “VERY WELL SAID SIR …IN SUCH A SHORT AND SIMPLE WAY…”

    Thanks.

  6. veerubhai says:

    लोकतंत्र में जो हो जाए थोड़ा है .
    लोकतंत्र में जो हो जाए थोड़ा है ।
    बाबा को पहना दै कल जिसने सलवार ,
    अब तो बनने से रही ,फिर उसकी सरकार ।
    रोज़ -रोज़ पिटने लगे ,बच्चे और लाचार ,
    कैसा है ये लोकमत ,कैसी है सरकार ।
    और जोर से बोल लो, उनकी जय जयकार ,
    सरे आम पिटने लगे मोची और लुहार ।
    संसद में होने लगा यह कैसा व्यापार ,
    आंधी में उड़ने लगे नोटों के अम्बार ।
    संसद बनके रह गई कुर्सी का औज़ार ,
    कुर्सी के पाए हुए गणतंत्री – गैंडे चार ।
    जबसे पीज़ा पाश्ता ,बने मूल आहार ,
    इटली से होने लगा सारा कारोबार .

  7. veerubhai says:

    “भ्रष्टाचार निवारक ,कपाल भाति “बड़ी ही गूढ़ अभिव्यक्ति लिए है .आपसे असहमत होना मुश्किल है .आभार आपका .आपने इस विषय पर लेखनी उठाई .

  8. रेखा says:

    बाबा रामदेव पर मेरे ब्लॉग पढ़े
    http://josochanahi.blogspot.com/
    http://achal-anupam.blogspot.com/

  9. Jyoti Mishra says:

    baba has left yoga…
    now he is busy in political yogmaya 🙂

  10. ZEAL says:

    बहुत उत्कृष्ट लिखा है भूषण जी । अनुलोम और विलोम की सामयिक व्याख्या।

  11. “मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि…..” अब कोई प्रतिज्ञा न करें …

  12. लीजिये बाबा का ही अनुलोम विलोम हो गया\ क्या फर्क रहा मन मोहन और बाबा मे उधर रिमोत इतालियन के हाथ इधर नेपाली के हाथ। चलो जनता की जय बोलो। शुभकामनायें\

  13. भूषण जी, बहुत ही काम की सलाह दी है। पर काश उनके समझ में भी आती।

    ———
    बाबूजी, न लो इतने मज़े…
    चलते-चलते बात कहे वह खरी-खरी।

  14. भूषण जी ,
    आपका लिखने का ढंग अनोखा है और विषय भी हर बार नया होता है ! आपके लेख नई जानकारी से ओतप्रोत होते हैं ! अनुलोम-विलोम….रोचक ढंग से सही बात कही है……

  15. Babli says:

    आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए शुक्रिया!
    बहुत बढ़िया लिखा है आपने! मैं आपकी बातों से पूरी तरह सहमत हूँ! रोचक बात कही है आपने!

  16. समसामयिक विषय वास्तु को लेकर आपने अच्छा व्यंग्य कसा है …

  17. सार्थक पोस्ट के लिए आभार!
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion – स्त्री अज्ञानी ?

  18. रोचक ढंग से सही बात कही है आपकी बात से सहमत हूँ।

  19. कई दिनों व्यस्त होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका

  20. सदा says:

    बेहद सटीक एवं सार्थक प्रस्‍तुति ।

  21. Babli says:

    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

  22. very nice words u say….. Visit My Blog Plz…
    Download Free Music
    Download Free Movies

  23. Sunil Kumar says:

    sahi ray baba ko shubhkamnayen ….

  24. Rachana says:

    baat kahne ka aapka dhang bahut sunder hai .
    me aapki baat se shmat hoon
    saader
    rachana

  25. रोचक पोस्ट

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