Hi, Dad !! Very bad.

आज के समाचारपत्र से मालूम हुआ कि आज फ़ादर्स डे हैएक कसक सी दिल में भर गई.

नौकरी के सिलसिले में मैंने कश्मीर से कन्या कुमारी तक देखाकई कारणों से अधिकतर नौकरी के दौरान अकेले रहना पड़ा. इनमें मातापिता की सेहतबच्चों की पढ़ाई आदि थे.

भारत सरकार की सलाह मानते हुए बच्चों के जन्म में अंतर रखासमय आया जब बच्चों में से कोई 10वीं में आ रहा था तो कोई 12वीं में. ऐन वक़्त पर मेरे बैंक को स्थानांतरण की याद आती थीस्पष्टतः बच्चों की पढ़ाई पहला चुनाव रहाइस पर पत्नी की भी सहमति थी.

इधर बच्चों का पालनपोषण अकेली माँ ने कियाउस पर दोहरा बोझ था. बच्चे आसपास समाज से महसूस करते थे कि वे पिता के दूर पल रहे थे. मैं भी सहसूस करता था और जानता था कि इसका मेरे भावनात्मक जीवन पर और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

सेवानिवृत्ति से कुछ पूर्व बैंक ने मुझे चंडीगढ़ स्थानांतरित कर दियातब तक दोनों बेटियों की शादी हो चुकी थीउनके साथ कम रहने की तकलीफ़ आज भी सालती है. पत्नी और बेटे को देखता हूँ कि वे भावना रूप से संतुष्ट नहीं हैं. .

इस मनःस्थिति से लड़ने के लिए कुछ शब्द अपने पास रख छोडे हैं जो उत्साह देते रहते हैं.
जो बीत गई सो बीत गई
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
तुझ से भी दिल फ़रेब थे ग़म रोज़गार के
आदि.

आख़िर में यही कि नौकरी के लिए कई समझौते करने पड़ते हैंसो Hi, lad !! Never be sad. God bless.

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Born on January, 13, 1951. I love my community and country.
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15 Responses to Hi, Dad !! Very bad.

  1. 'कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता'
    बस ज़िन्दगी समझौता ही तो है जो नही कर पाता वो भी दुखी जो कर लेता है वो भी। फिर भी चलते जाना है। शुभकामनायें।

  2. आपकी यह कसक बहुतों की कसक होगी।
    बच्चे अगर बचपन में माता-पिता के साथ न रहें तो उनके भावनात्मक विकास में कुछ कमी रह जाती है।
    अब तो यही सोच कर मन को समझाना पड़ेगा कि – जो बीत गई, सो बीत गई।

  3. Pallavi says:

    सब से पहले तो आप मेरे पिता समान है इसलिए आप को Happy fathers day uncle :)दूसरी बात आप को जो कसक है उसका दूरी होने के साथ-साथ एक यह कारण भी है, कि लड्कीयौन का पापा से ज्यादा लगाव होता है, और ऐसे वक़्त में दूरी कितनी खलती है यह मैं भी बहुत अच्छे से समझ सकती हूँ क्यूंकि जितना दुर आप हैं अपनी बेटियों से उतना ही दूर में भी हूँ अपने पापा से इसलिए मैं आप कि भावनाओं को बहुत अच्छे से समझ सकती हूँ 🙂

  4. ज़िंदगी में समझौते तो करने ही पड़ते हैं पर ये कसक बहुत बेचैन करती है ..

  5. सुंदर..सूक्ष्म …अद्भुत विचार …
    बधाई …
    सच बात कही है आपने. पितृ दिवस पर बहुत शुभकामनायें।

  6. daanish says:

    सच है…
    रोज़गार के सिलसिले में
    काफी समझौते करने पड़ते हैं

    मननीय आलेख .

  7. sacaaI hai
    पितृ दिवस पर हमारी भी बधाईयां

  8. आप मेरे पिता समान है इसलिए आप को Happy fathers day uncle :)मेरे ब्लॉग पर आ कर मेरा होंसला बढाए !
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  9. जीवन का नाम ही समझोता है .. पर भाव्नात्मन स्तर पर जुड़ाव रहना चाहिए .. पितृ दिवस पर बधाई ..

  10. Sunil Kumar says:

    मार्मिक संस्मरण, समझौते ज़िंदगी एक हिस्सा बन गयीं है

  11. ZEAL says:

    .

    भूषण जी ,

    माता-पिता अपने बच्चों के लिए आजीवन बहुत सी sacrifices करते हैं। उनके बच्चे इस बात को realize भी करते हैं । और उसी से सीखते भी हैं। और फिर वे भी अपने माता-पिता की तरह , अपने बच्चों के लिए भी बहुत से बलिदान देते हैं। माता-पिता अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल होते हैं।

    जितना मैं आपको जानती हूँ। आप एक आदर्श पिता हैं । गर्व है मुझे आप पर।

    पितृ दिवस की शुभ कामनाएं।

    .

  12. Anonymous says:

    Dear Bhushanji very good post on Dad he sacrificed his Life for his family…
    Nitin…..

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