The Chamars and Putt Chamaran De द चमार और पुत्त चमाराँ दे

A book titled ‘The Chamars’ by M.G.W. Brings was published in the year 1920 wherein 1156 castes were mentioned as Chamars i.e. a single caste with different names. There was a large scale move of hatred started against the word Chamar. The purpose was to divide Dalit castes. It was so poisonous propaganda that Dalit castes which were never averse to ‘Chamar’ word started distancing themselves from it.

In the recent past a religious head of this community was murdered in Vienna. In the circumstances Ravidasia (Chamar) community went ahead with establishing their own religion named ‘Ravidassia’. Its emblem has ‘Hari’ in it. Some people opine that it should have been ‘Ravi’ instead.

Ravish Kumar of NDTV has covered these developments in three parts. You Tube links are given below. These are important documents. 


Part-3

वर्ष 1920 में एम.जी.डब्ल्यू. ब्रिंग्स द्वारा लिखित दि चमार्सनामक पुस्तक में 1156 जातियों के चमारहोने का उल्लेख किया था. फिर मुहिम चली. ‘चमार’ शब्द के प्रति बड़े पैमाने पर घृणा की लहरचली. इसका प्रयोजन दलित जातियों में भीतरी दरार पैदा करना था. यह प्रचार इतना विषैला था कि इसके कारण अन्य दलित जातियाँ जो पहले ‘चमार’ शब्द से परहेज़ नहीं करती थीं वे स्वयं को चमार शब्द से दूर करने लगीं.

अधिक समय नहीं हुआ जब वियेना में इस समुदाय के एक डेरा प्रमुख की हत्या कर दी गई. इन परिस्थितियों में रविदासिया (चमार) समुदाय ने उत्तर प्रदेश में अपना धर्म स्थापित कर लिया है जिसे रविदासिया धर्म कहा गया है. इसके शुभंकर में ‘हरि’ शब्द लिखा है. कुछ लोगों का मत है इसे ‘रवि’ होना चाहिए था.

इन घटनाओं को एनडीटीवी के रवीश कुमार ने विशेष रूप से तीन खंडों में कवर किया है. इसके यू-ट्यूब लिंक्स पाठकों की जानकारी के लिए नीचे दिए गए हैं. तीनों खंड महत्वपूर्ण दस्तावेज़ हैं.

भाग-3

Other links:

http://en.wikipedia.org/wiki/Ravidasi

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Key words: Chamar, Putt Chamaran De, Ravidasia Religion, Hari, Chamars NDTV report, हरि, ਹਰਿ  

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4 Responses to The Chamars and Putt Chamaran De द चमार और पुत्त चमाराँ दे

  1. भूषण जी,
    चमार को चमार व भंगी को भंगी नहीं कहना चाहिए,
    कहते है कि कोई कानून है जो ऐसा कहने से मना करता है।

  2. Bhushan says:

    @ संदीप जी
    आपने सही कहा कि किसी व्यक्ति को इन शब्दों से संबोधित नहीं करना चाहिए. यहाँ किसी को ऐसा कह कर संबोधित नहीं किया गया. इस पोस्ट का विषय इस शब्द और कुछ गीतों के संदर्भ में है. यह सीधे तौर पर एनडीटीवी की रिपोर्ट से जुड़ा है जिसे यहाँ साझा किया गया है.

  3. एक और धर्म। वाह! इसके ग्रन्थ और नियम?

  4. Dorothy says:

    रवीश जी की रिपोर्ट के लिंक्स के लिए आभार. इस तरह की जानकारी से न केवल हमारे ज्ञान का दायरा बढ़ता है, पर हममें अपने आस पास को देखने और समझने का दृष्टिकोण भी विकसित और समृद्ध होता है. एक बार पुन: आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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