Monthly Archives: August 2011

‘Anna Effect’ – ‘अन्ना प्रभाव’

Though it is premature to say so but it can still be said that a sort of ‘Anna Effect’ is now prevailing over industrial circles. There is a talk going on that atmosphere for local as well as foreign investments … Continue reading

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Nirmukta

I have found Nirmukta.com very educative and rational place to read at. Previously also I have blogged few articles from this site. Yesterday I visited Nirmukta. There were few good articles there, hence this sharing:- A New Belief System For … Continue reading

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कोली, कोरी, कोल- भारतीय मूलनिवासी कबीले

English version  पठानकोट से मेरे एक अनजाने मित्र प्रीतम भगत ने मोबाइल पर बताया कि बुद्ध की माता कोली (कोरी) समुदाय से थीं. मेरी रुचि बढ़ी. इंटरनेट ने एक ऐसे आलेख पर पहुँचने में मदद की जो कोली समुदाय के … Continue reading

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Om Puri – अर्द्धसत्य का पूर्णसत्य

ओम पुरी जी, बल्ले…बल्ले…कमाल कर दी. फिक्र नहीं, कह दी तो कह दी. अर्द्धविराम का पूर्णविराम होता है तो अर्द्धसत्य का पूर्णसत्य भी होता है जो तुमसे कल सुना. अण्णा हज़ारे के मंच पर और अण्णा के पास खड़े हो … Continue reading

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The other side of Anna Hazare’s movement अन्ना हजारे के आंदोलन का दूसरा पक्ष

एनजीओ घुस आयो रे !!!! It was very serious movement against corruption. I am impressed. But there is other side (may be funny as well) of this movement. Now it has become amply clear that it was a move by … Continue reading

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Why we like loneliness in images – एकाकीपन के चित्र क्यों अच्छे लगते हैं

बचपन से ही मुझे इस चित्र ने आकर्षित किया है जिसमें एकाकी रेगिस्तानी हरा पेड़ होता है. दूसरे चित्र भी अच्छे लगते हैं जैसे एकाकी घोड़ा, नाव, टापू, धरती, पुरुष, स्त्री, पक्षी, बादल आदि.  अकेलेपन की ये छवियाँ क्यों अच्छी … Continue reading

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Wake up Anna Hazare – अण्णा!! तुम्हें चेतना होगा

तेज़ हवा में दीपक की लौ स्थिर नहीं रह सकती. कोई आंदोलन ‘चलाया’ जाता है तो भीड़ बहने लगती है. भीड़ की मानसिकता के दबाव में मेरे जैसे आम आदमी का बह जाना एक आम बात है. फिर भी प्रकृति … Continue reading

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