Saffron speaking – मैं भगवा बोल रहा हूँ

आप हैं ब्लॉगर. आपने बहुत कुछ कहा है. अहो भगवन्!! यदि हमें सुना जाए तो कुछ कहा जाए.
हमारी अपनी मर्यादा है. भगवा मर्यादा. कुछ कहने से पहले सह्स्र बार सोचेंगे. सत्य यही है कि हम आज के भारतवर्ष में अपनी लज्जा, मानमर्यादा बचाए-बचाए फिरते हैं.
लोग हमें पहन कर गौरवान्वित होते हैं. हम अपने पहनने वाले के कार्य पर गर्व करते हैं. उसकी पावन तरंगें हमें भी पावन कर देती हैं.
अपने मन-विचारों से तंग आया व्यक्ति भगवा पहनता है, शायद उसे शांति मिलती है. वानप्रस्थ के बाद शुद्ध आत्मिक अवस्था पाने के इच्छुक सज्जन मुझे प्रतीक रूप में धारण करते थे. वे अलग दिखना चाहते थे और दिखते भी थे.
आज मुझे पहन कर कोई पवित्रता की खिल्ली उड़ाता है तो कोई ज्ञान-ध्यान देने के बहाने पब्लिक को लूटता है. कोई मुझे पहन कर धर्मदंड सहित पुलिस वैन में अकड़ कर बैठता है तो कोई थाने और न्यायालय में दनदनाता है. भगवाधारी हत्याएँ करने वाला जेल भोगी बाहर आकर फिर भगवा पहन लेता है. यदि कोई फाँसी से पूर्व सुधरने के लिए मेरे सहित फाँसी चढ़ने कीअंतिम इच्छा कर दे तो मैं क्या कर लूँगा!!
आतंकवादी मुझे धारण करके प्रकट हो सकता है. मुझे छोड़िए तिरंगाबाना पहन कर आ सकता है. तब उसे सैल्यूट मारेंगे या गोली?
उन राजनेताओं का क्या करेंगे जो मुझे पहन कर राजनीति करते हैं. काले धन को सफेद करने का धंधा करने वाले स्वामी-बाबा भी मुझे पहनते हैं.
मुझे कोई पूछे कि हे सरल भगवे! तेरा रंग कैसा? तो कहूँगा- मेरे रंग पर न जाओ, मुझे पहनने वाले व्यक्ति को पहचानो. 

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24 Responses to Saffron speaking – मैं भगवा बोल रहा हूँ

  1. आज हर कोई बात तो करता है ज्ञान की विज्ञान और डगर पकड़ता है झूठ की अपमान की !

  2. रेखा says:

    व्यक्ति की पहचान तो उसके कर्मो से होती है और भगवा रंग तो शौर्य का प्रतीक है. हमारे तिरंगे का पहला रंग यही है और यह देश भक्ति का प्रतीक भी है.

  3. Bhushan says:

    @ रेखा जी,
    शब्दकोश से जाँच की है. भगवा और गेरुआ पर्यायावाची के रूप में देखे हैं. केसरिया रंग शौर्य के प्रतीक के रूप में प्रयुक्त हुआ है. तिरंगें में केसरिया रंग है. जो अभी तक पढ़ा-जाना है उसके अनुसार भगवा रंग संन्यास, परमार्थ और वैराग्य के प्रतीक के रूप में जाना जाता है.

  4. Jyoti Mishra says:

    exactly its not the color but the brain and heart behind that color matters.
    Brilliant viewpoint on a contemporary issue.
    Nice read as always !!

  5. जी गंभीर बात कही है कोई मुझे पहनकर पवित्रता की खिल्ली उड़ाता है कोई ज्ञान देने के बहाने पब्लिक को लुटता है| हालाँकि मेरा मानना है बहुत दिनों तक ये स्थिति नहीं रहेगी क्योंकि लोग अब सही और गलत में अंतर को समझने लगे हैं|

  6. भगवा धारण करने से कोई संत नहीं हो जाता,हाँ संत हो जाने पर जरुर भगवे की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।

  7. Apanatva says:

    badiya kataksh .

  8. भगवा रे भगवा तेरा रंग कैसा ?

    मेरा रंग तो वही रहता है लेकिन मुझे धारण करने वाले गिरगिट की तरह रंग बदलते रहते हैं।

    भूषण जी, भगवे का आत्मकथ्य प्रस्तुत करने के लिए आभार।

  9. veerubhai says:

    भाई साहब किसको “भगवा -ना “है .सुपारी लीजिए आपका काम हो जाएगा .इस देश में अब “भगवा” का एक अर्थ साम्प्रदायिक कुछ सेक्युलर पुत्र लगाने समझाने लगें हैं .शिक्षा भी सुना एक मर्तबा भगवा हो गई थी .और जात न पूछो ,वेश न देखो साधू का पूछ लीजिए ज्ञान .अलबत्ता कुछ लोग भगवा धारण कर स्व -घोषित भगवान् बन गए हैं तैतीस करोड़ देवताओं वाले देश में .यहाँ रात दिन प्रवचन होता है ,उसी अनुपात में अस्मतें भी लुट रहीं हैं बेहतरीन विचार उत्तेजक पोस्ट आभार आपका …कृपया यहाँ भी पधारें .Super food :Beetroots are known to enhance physical strength,say cheers to Beet root juice.Experts suggests that consuming this humble juice could help people enjoy a more active life .(Source: Bombay Times ,Variety).

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  10. Bhushan says:

    @ veerubhai
    राम राम वीरूभाई जी, चोखी कही आपणे. कुछ बातें जो भगवा रंग नहीं कह सका आपने कह दीं. आपका आभार.

  11. Excellent piece of writing…wonderful thought

  12. मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

  13. ये जो कलयुग है न हमारी प्रतीकों की धज्जियाँ किस कदर उड़ा रहा है कि हम लोग तमाशबीन होकर रह गए है.सटीक आलेख

  14. veerubhai says:

    मृत्यु शैया ,मौत के तकरीबन मुंह में से लौटे लोगों के(नीयर दिमाग की मेपिंग पर कई माहिर काम कर रहें हैं .बेशक इन्हें दिव्य दर्शन और गहन अनुभूतियाँ होतीं हैं इस अवस्था में लेकिन मनो -रोगों के माहिर इन अनुभवों को “रिलीजियस हेल्युसिनेसन “कहतें हैं .अलबत्ता निश्चेतक (चेतना हारी पदार्थ ,निश्चेतक ,एनस्थेतिक hamen भी दो बार दिया जा चुका “प्रोलेप्स डिश्क एक्सिज़ं और कोरोनरी आर्टरी बाई पास सर्जरी “के दरमियान ,ऐसा कोई अनुभव या हेल्युसिनेसन चेतना हारी पदार्थों के स्तेमाल से नहीं जुड़ा है .हेल्युसिनेसन (धार्मिक -विभ्रम )में तो व्यक्ति खुद को भगवान् भी घोषित कर देता है (इस दौर में कई सगुण ब्रह्म मौजूद हैं हिन्दुस्तान में ,खरबों खरब की संपत्ति छोड़ कर इच्छा मृत्यु को प्राप्त हुएँ हैं कई “भग -वान .”शुक्रिया आपकी तात्कालिक दस्तक के लिए .http://veerubhai1947.blogspot.com/
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    आखिर इस दर्द की दवा क्या है?
    Posted by veerubhai on Friday, August 5
    Labels: -वीरेंद्र शर्मा(वीरुभाई), pain killer and pain, ड्रग एडिक्‍ट, दर्दनाशी, नशीली दवाएं

  15. बहुत सटीक लिखा है सर ।

    सादर

  16. prerna argal says:

    This comment has been removed by the author.

  17. भूषण जी,
    बहुत सटीक लिखा है …..
    भगवे! तेरा रंग कैसा? तो कहूँगा- मेरे रंग पर न जाओ, मुझे पहनने वाले व्यक्ति को पहचानो !

  18. 'मेरे रंग पर न जाओ , मुझे पहनने वाले व्यक्ति को पहचानो '

    भूषण जी ,
    बिलकुल सच कहा भगवे ने |

  19. prerna argal says:

    “ब्लोगर्स मीट वीकली {३}” के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार ०८/०८/११ कोब्लॉगर्स मीट वीकली (3) Happy Friendship Day में आप आमंत्रित हैं /

  20. यह लेख क्यों? मेरी समझ में नहीं आया। भगवा तो तो है ही कुछ अलग?

  21. Bhushan says:

    @ चंदन कुमार मिश्र
    यह आलेख इसलिए क्योंकि भगवा अपने मूल रूप में मुझे अच्छा लगता है.

  22. हाँ, गर भगवा बोलता तो यही बोलता…

    बेहतरीन प्रस्तुति. आभार.

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