मन में आज भी गाते हैं मुकेश

बड़ी मुश्किल है. रिटायर होने के बाद ऐसी-ऐसी बातें याद आती रहती हैं जिन्हें मैंने शायद ही कभी मुड़ कर याद करने की कोशिश की हो. इन यादों में मेरे पाप-पुन्न भी हैं और अच्छी-बुरी घटनाएँ भी हैं, सहेलियाँ-सहेले भी, फिल्मों के दृष्य भी और गीत भी. शायद मेरी उम्र के नौजवानों को भी पुरानी फिल्मों के गीत सोते हुए या जागते हुए अचानक याद आ जाते होंगे या उनके सिर में बजते होंगे. अलबत्ता मेरे साथ ऐसा होता है.
कल से ही मुकेश का एक गीत मेरे सिर में बज रहा था- ये वादा करो चाँद के सामने, भुला तो न दोगे मेरे प्यार को”. इस गीत का मेरी उम्र के साथ कुछ लेना-देना नहीं (ताल-मेल नहीं है मैं ऐसा कहना नहीं चाहता). यह मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा था. यहाँ सच नहीं लिखूँगा तो कहाँ लिखूँगा कि मैंने जीवन में भजन-वजन बहुत सुने हैं लेकिन गाए कम ही हैं. उनका साऊँड ट्रैक मेरे सिर में शायद ठीक से अपलोड नहीं हुआ. बेटा शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में है. भजन गाता है….बहुत सुरीले. उसके भजन सुन लेता हूँ.
वह कमबख़्त गीत कल रात से सिर में बज रहा था. हमारे शरीर और मस्तिष्क में चाहा-अनचाहा समन्वयन होता है. वह अपने आप होता है और हो गया….मेरे गले से मुकेश के सुर खिंच-खिंच कर निकलने लगे. कितनी ऊँची पिच पर गा रहा था कोई होश नहीं थी. आवाज़ कौए से कुछ बेहतर है यह अनुभव से ज्ञात है.
ऐसी स्थिति में जो होना था वही हुआ. बेटा यह मेडन साँग सुन कर कब बरामदे में आया पता ही नहीं चला. जब मेरा ध्यान उस पर गया तब वह दरवाज़े पर उलझन में डूबा सिर खुजा रहा था. एक बार तो मन में आया कि गीत फेंक कर भजनिया सुर उठा लूँ. लेकिन नहीं हुआ. मैंने मुकेश का गीत पूरा गा दिया.
गीत से दिमाग खाली होते ही बेटे ने पीठ थपथपा दी. महसूस हुआ कि उस्तादाना आशीर्वाद मिल गया है.
कल फिर मुकेश का इंतज़ार करूँगा क्योंकि उसके प्यार को इस तरह से भुलाना, न दिल चाहता है न हम चाहते हैं. यह गीत ताल इकहरवा में है, वह भी 11 मात्रा वाला. इस ताल में गाने से बड़े-बड़े गायक घबराते हैं. 

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13 Responses to मन में आज भी गाते हैं मुकेश

  1. हिंदी फिल्मों के महान गायक मुकेश कभी भुलाये नहीं भूलते .
    रक्षा बंधन की बधाई !

  2. रेखा says:

    एक बार तो मन में आया कि गीत फेंक कर भजनिया सुर उठा लूँ. लेकिन नहीं हुआ. मैंने मुकेश का गीत पूरा गा दिया.

    मुकेश के गीत ही ऐसे है की वह किसी भी उम्र पर हावी हो सकते है . कुछ दिनों पहले मेरे पतिदेव पर भी मुकेश का एक गीत चढ़ गया था.

  3. मुकेश के बारे में इतना ही कहूंगा कि बहुत से अच्छे गायक हैं हिन्दी संगीत में, जो अच्छे लगते हैं। पचासों हैं जिन्हें पसन्द करना मजबूरी और आवश्यक है। उनमें मुकेश ऐसे हैं जिनके गाए सभी गीत पसन्द आ जाएंगे। रफ़ी और किशोर के बेहतर और सुन्दर गाने के बावजूद, उनके हर गाने को पसन्द नहीं कर सकता कोई भी। लेकिन मुकेश के हर गाने चाहे वे कैसे भी हों, पसन्द आते ही हैं क्योंकि उनकी अवाज कुछ अलग ही है। वैसे अभी संन्यासी का चिन्ता मत कर रे इंसान, याद आ रहा है।

  4. sm says:

    Mukesh was one of the greatest singer of India

  5. आपके साथ मुकेश को याद करना सुखद लग रहा है .. बढ़िया पोस्ट .

  6. Sadhana Vaid says:

    मुकेश के गीत मन में गहराई तक उतर जाते हैं और ना जाने कैसे मन की हर स्थिति के लिये बिलकुल उपयुक्त और गेय उनके गीत खुद ब खुद जुबां पर आ जाते हैं ! उनके गीत गुनगुना कर इंसान अपना सारा दुःख दर्द स्वरों के साथ बाहर निकाल कर हल्का हो जाता है ! बहुत सुन्दर पोस्ट ! बधाई !

  7. हर दिल जो प्यार करेगा, वो गाना गाएगा…

    मुकेश के गीत दीवाना बना देने वाले हैं।

  8. veerubhai says:

    तेरे प्यार को इस तरह से भुलाना ,न दिल चाहता है ,न हम चाहतें हैं ……जी हाँ हमारा शरीर तंत्र सबसे सशक्त रेडियो -रिसीवर है ,अन्तरिक्ष में मौजूद विद्युत् चुम्बकीय तरंगों को पकड लेता है कुछ समय बाद ज्ञात होता है वही गीत रेडियो पे बज रहा है ………..हम चल रहे थे ,वो चल रहे थे ,मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे थे ……….लेकिन इसके लिए एक सांगीतिक तन और मन चाहिए ,…..
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

    रविवार, १४ अगस्त २०११
    संविधान जिन्होनें पढ़ा है …..

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/
    Sunday, August 14, 2011
    चिट्ठी आई है ! अन्ना जी की PM के नाम !

  9. स्वतन्त्रता दिवस की शुभ कामनाएँ।

    कल 16/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

  11. Nishant says:

    मोहम्मद रफ़ी, तलत महमूद, और मुकेश मुझे बहुत प्रिय हैं. मुकेश का गीत 'ये मेरा दीवानापन है' मैं अक्सर ही सुनता हूँ.

  12. कल फिर मुकेश का इंतज़ार करूँगा क्योंकि उसके प्यार को इस तरह से भुलाना, न दिल चाहता है न हम चाहते हैं. यह गीत ताल इकहरवा में है, वह भी 11 मात्रा वाला. इस ताल में गाने से बड़े-बड़े गायक घबराते हैं.

    बहुत ही भावुक बात कही आपने मुकेशजी दे कंठ – नाद को शत-शत नमन !

  13. हमारे ब्लॉग में भी अछि राय पाने को हम पलक पावड़ा बिछाये बैठे हैं.

    http://www.sukhdevkarun.wordpress.com

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