Why we like loneliness in images – एकाकीपन के चित्र क्यों अच्छे लगते हैं

बचपन से ही मुझे इस चित्र ने आकर्षित किया है जिसमें एकाकी रेगिस्तानी हरा पेड़ होता है. दूसरे चित्र भी अच्छे लगते हैं जैसे एकाकी घोड़ा, नाव, टापू, धरती, पुरुष, स्त्री, पक्षी, बादल आदि. 
अकेलेपन की ये छवियाँ क्यों अच्छी लगती हैं इसे जानने का कभी प्रयास नहीं किया था. आज सिग्मंड फ्रायड (Sigmund Freud) के ‘मनोविश्लेषण’ का अध्याय खोले बिना ये आकर्षक छवियाँ दे रहा हूँ जो मैंने नेट पर देखी हैं. 
ये इसलिए अकर्षिक लगती हैं कि एकाकीपन के अहसास को जिया है. इसलिए स्वयं को इन छवियों के साथ जोड़ कर देखता हूँ. ये अपनी लगती हैं. सृष्टि में जहाँ कहीं अकेलापन है वहाँ जीवन और जीवनगति का अहसास होना स्वाभाविक ही ध्यान खींचता है. हम उसके ज़रिए स्वयं को पहचानने लगते हैं और प्रकट एकाकीपन में अपनी सृजनात्मक और भावानात्मक संभावनाएँ ढूँढने लगते हैं.
जीवन के झुरते छोर

                          

बिन संगी, बिन नीड़

  

                   
लहरों पर नाव, तट से प्रेम
बूढ़े समुद्र में कोंपलें

                  

अकेला अश्व

                  

गीली ठंडक,  प्रतीक्षा का गीलापन

 

                  

 

 

अनंत नभ, पिघलता पथिक
व्योम में ताकती, धरती उर्वरा

                     
सखा शिखर, नेह आकाश

   

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17 Responses to Why we like loneliness in images – एकाकीपन के चित्र क्यों अच्छे लगते हैं

  1. चित्र अच्छे हैं। जब अच्छे लग रहे हैं, तो कौन सोचें कि क्यों। क्यों सोचते ही चित्र चिन्ता का विषय बन जाएंगे।

  2. Bhushan says:

    @ चंदन कुमार मिश्र
    🙂

  3. बहुत प्यारे हैं ये ….
    शुभकामनायें !

  4. जब दुनिया अपने मिज़ाज के विपरीत लगती है तो ऐसा होता है. आपके लेख़ को चर्चा मंच पे कल लाया जाएगा.

  5. Babli says:

    सुन्दर चित्रों से सुसज्जित शानदार प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को जन्माष्टमी की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

  6. भूषण जी ,
    बहुत ही अच्छी पोस्ट है …चित्र भी सुन्दर हैं …..
    मेरे हिसाब से मन अकेला नहीं है

    त्रिंजण मन
    लगा भावों का मेला
    नहीं अकेला

    जहाँ कहीं भी कोई अकेला दिखाई देता है …वहाँ उसके मन में भावों का मेला होगा …संगी -.साथियों के साथ चाहे हम कुछ सोचे या न सोचें परन्तु अकेले बहुत कुछ सोचने लगते हैं |

    हरदीप

  7. Jyoti Mishra says:

    yeah true… sometimes these loner picture look more fascinating than the colored ones.
    Never though of any specific reason behind it 😛

  8. आदरणीय श्री भूषण जी ,
    चित्र अच्छे हैं बहुत ही बढ़िया बहुत ही अच्छा लगा पढ़ कर

  9. आपको एवं आपके परिवार “सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया”की तरफ से भारत के सबसे बड़े गौरक्षक भगवान श्री कृष्ण के जनमाष्टमी के पावन अवसर पर बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें लेकिन इसके साथ ही आज प्रण करें कि गौ माता की रक्षा करेएंगे और गौ माता की ह्त्या का विरोध करेएंगे!

    मेरा उदेसीय सिर्फ इतना है की

    गौ माता की ह्त्या बंद हो और कुछ नहीं !

    आपके सहयोग एवं स्नेह का सदैव आभरी हूँ

    आपका सवाई सिंह राजपुरोहित

    सबकी मनोकामना पूर्ण हो .. जन्माष्टमी की आपको भी बहुत बहुत शुभकामनायें

  10. श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें.

  11. बहुत सुन्दर चित्रों का समावेश … आपसे सहमत हूँ इसके विश्लेषण के बारे में …

  12. ऐसे एकांकी चित्र, विपदाओं के बीच नन्हे संघर्ष और विजय का प्रतीक होते है। यह हमारे पुरूषार्थ की अभिव्यक्ति होते है। इसीलिए अच्छे लगते है।
    बहुत ही प्रेरक चित्र!! शुभकामनाएं!!

  13. सुन्दर चित्रों की शानदार प्रस्तुती….भूषण जी ,

  14. Pallavi says:

    बहुत अच्छा collection है आप का और उतनी ही अच्छी आपकी पसंद। मनुष्य भले ही कहने को सामाजिक प्राणी है और समाज के बिना उसका कोई अस्तित्व नहीं लेकिन कभी-कभी सभी का मन कुछ देर के लिए ही सही अकेला पन पाना चाहता है। क्यूँ इसका जवाब तो आपने खुद ही लिखा है। सादगी भरी प्रस्तुति के लिए धन्यवाद….

  15. इन तस्वीरों ने रोक सा लिया है…

  16. Suraj Patel says:

    Wow..बिल्कुल ऐसा ही मै सोचता हूँ। बहुत बढ़िया।

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