The other side of Anna Hazare’s movement अन्ना हजारे के आंदोलन का दूसरा पक्ष

एनजीओ घुस आयो रे !!!!

It was very serious movement against corruption. I am impressed. But there is other side (may be funny as well) of this movement.

Now it has become amply clear that it was a move by NGOs holding thousands of crores of rupees. Anna Hazare was doing his part in Maharashtra very gracefully.
Suddenly a group of NGOs approached him with a very big offer to lead a revolutionary looking movement against corruption. After deliberations with his people he agreed to the proposal.
He came to Delhi and started his movement with local hosts. Initially media coverage did not give Anna much importance. One fine evening a note giving importance to what Anna had said was issued by government circle. The very next morning Anna was in headlines. Political game between parties started and slowly got momentum. During this period an infant movement by saffron Swami Ram Dev Yadav was suppressed.
Then started fast of Anna. All news channels beamed the news round the clock for weeks together. All other news regarding corruptions was shortened to fit. Anna lost 5kg of weight. Government and Team Anna tried to tire out each other. A normal game.
There appeared yet another very rich NGO (Shri Shri Shri Ravishankar) for mediation (not meditation). Yet another Bhayyu ji Trust (another NGO) appeared. The other person is Umesh Sarangi, one of senior most IAS officers and retired Chairman of National Bank for Agriculture and Rural Development (NABARD) of Government of India. We must remember that Anna is known for his expertise in watershed development which is supported by NABARD. Anna had been hero of this Bank.
Then, after few days of fasting Anna became weak and Arvind Kejriwal was beamed as almost sole spokesman and eloquent person. Prashant Bhushan and other members (almost all running NGOs) of Anna’s team got premium coverage on channels. Anna appeared here and there without garlands and his Gandhian cap.
However, one may see a holy thread on his wrist and a garland in his neck. Ah!
येन बद्धो बलीराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे माचल माचल।।
(I am swathing you the way King Mahabali was tied up (deprived of his kingdom and resources) through a declaration/agreement . Don’t move, don’t move !!)
Jai Ho ‘NGO Fraternity’. 
Anna you may become immortal like King Mahabali. You have to see whether these NGOs together with government are experimenting with the constitution?
Wake up Anna….wake up. It seems you need not be aware of it, but aboriginals of India do.

Victims of Manusmriti and corruption. मनुस्मृति और भ्रष्टाचार की मार झेलते.
भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह एक बहुत गंभीर आंदोलन था. मैं सहमत हूँ. लेकिन इस आंदोलन का एक दूसरा पक्ष भी है (यह थोड़ा हास्यास्पद हो सकता है).
अब तक यह बात बहुत स्पष्ट हो चुकी है कि यह आंदोलन हज़ारों करोड़ रुपए वाले गैर सरकारी संगठनों (गैससं) का था. अन्ना हज़ारे अपना कार्य महाराष्ट्र में बहुत गरिमामय तरीके से कर रहे थे.
अचानक गै.स. संगठनों का एक समूह उनके यहाँ गया और बहुत क्रांतिकारी दिखने वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को नेतृत्व देने का अनुरोध किया. अपने लोगों के साथ चर्चा करने के बाद अन्ना ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया.
अन्ना अपने मेहमाननवाज़ों के साथ आंदोलन शुरू करने के लिए दिल्ली आए. प्रारंभ में मीडिया कवरेज ने इसे अधिक महत्व नहीं दिया. एक शाम सरकारी स्रोत से एक नोट जारी हुआ कि हम अन्ना की बात को महत्व देते हैं. अगले दिन अन्ना सुर्खियों में दिखे. राजनीतिक पार्टियों की राजनीतिक हलचल धीरे-धीरे तेज़ हो गई. इस अवधि में भगवा स्वामी रामदेव यादव के शिशु आंदोलन को कुचल दिया गया.
तब अन्ना का अनशन शुरू हुआ. सभी समाचार चैनलों ने इस समाचार को कई सप्ताह तक दिन-रात दिखाया. भ्रष्टाचार से संबंधित अन्य सभी समाचार छोटे कर दिए गए. अन्ना का भार 5 किलो घटा. भारत सरकार और अन्ना टीम ने एक-दूसरे को थकाने की कोशिश की. सामान्य बात.
तभी एक और धनी गैससं (श्रीश्रीश्री रविशंकर) मध्यस्थता (न कि प्राणायाम) के लिए प्रकट हुए. एक और न्यास (भय्यू जी महाराज) भी प्रकट हुए. यह भी एक गैससं है. एक अन्य मध्यस्थ का नाम श्री उमेश सारंगी है जो वरिष्ठ आईएएस हैं और भारत सरकार के राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के भूतपूर्व अध्यक्ष हैं. हमें याद है कि अन्ना को नाबार्ड द्वारा समर्थित वाटरशेड विकास में उनकी विशेषज्ञता के कारण जाना जाता है. अन्ना इस बैंक के हीरो रहे हैं.
अनशन के कुछ दिनों के बाद अन्ना कमज़ोर हो गए और अरविंद केजरीवाल लगभग एकमात्र प्रवक्ता और बोलने वाले व्यक्ति के तौर पर उदित हुए. प्रशांत भूषण और अन्य सदस्य (लगभग सभी गैससं चलाते हैं) को चैनलों पर ज़ोरदार कवरेज मिली. अन्ना यहाँ-वहाँ बिना हार और बिना गाँधी टोपी के नज़र आते रहे.
तथापि कोई भी व्यक्ति अन्ना की कलाई पर मौली और गले में हार देख सकता है.
येन बद्धो बलीराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे माचल माचल।।
(जिस प्रकार दानियों में श्रेष्ठ एवं महाबलशाली राजा बली को वचन में बाँध लिया था (उसका साम्राज्य/संसाधन ले लिए थे) उसी प्रकार तुम्हें वचनबद्ध करता हूँ. भागना मत!!)
जय हो ‘गैर सरकारी संगठन भ्रातृसंघ’. 
अन्ना तुम राजा महाबली की भाँति अमर भी हो सकते हो. तुम्हें देखना पड़ेगा कि ये गैससं भारत सरकार से मिल कर क्या भारतीय संविधान के साथ कोई प्रयोग कर रहे हैं?
चेतो अन्ना….चेतो.  लगता यह भी है कि तुम्हें नहीं बल्कि बहुसंख्य मूलनिवासी भारत को चेतने की आवश्यकता है. आम अनपढ़ जनता नहीं जानती कि ‘अन्ना’ क्या है और उसका ‘असर’ कहाँ होना है. यह टीविया आंदोलन ड्राइंग रूम्स में खलबली मचा कर चला गया. यदि यह अनपढ़ जनता भ्रष्टाचार के विरुद्ध सड़कों पर उतर आती तब आंदोलन का प्रभाव नज़र आता.

Other links
NGO NGO SCAM SCAM

Tehelka.com – Is RSS running the Anna show?
The Hindu  I’d rather not be Anna : Arundhati Roy – (हिंदी अनुवाद)

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Born on January, 13, 1951. I love my community and country.
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31 Responses to The other side of Anna Hazare’s movement अन्ना हजारे के आंदोलन का दूसरा पक्ष

  1. असल मुद्दे को दरकिनार कर बुद्धिजीवी वर्ग अन्ना के पीछे हाथ धो कर पड़ गया है।
    सरकार तो यह सब देख-सुन कर खुश हो रही होगी कि उसकी कुटिल चाल आखि़र कामयाब हो ही गई।

  2. Bhushan says:

    @ mahendra verma जी
    आपसे सहमत हूँ. अन्ना की नीयत पर शक करना ठीक नहीं. हमारे यहाँ का भ्रष्टतंत्र इतना वाचाल है कि वह अन्ना को बेदाग़ नहीं देखना चाहता.

  3. Vijai Mathur says:

    दरअसल चालाक और पैसे वालों के समर्थक अन्ना का जैकारा लगा कर संविधान और संसद की सर्वोच्च्त्ता को नष्ट करके अर्ध सैनिक तानाशाही स्थापित करना चाहते हैं। आम जनता ठगी की ठगी रह जाएगी।

  4. भरत भूषण जी मे आप की बात से सहमत नहीं हु ,सर कोई तो सरकार के भ्रष्टतंत्र के खिलाफ आगे आया है ,आप नहीं जानते सर देश मे कितना भ्रष्टाचार फैला हुआ है,मुझे भ्रष्टाचार के कारण सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई,सर मेरी भर्ती कंप्यूटर अधियापक के तोर पर हो गया था परन्तु सरकार के ऑफिसर ने पैसे ले कर और किसी को नौकरी दे दी ,मैने आदालत का दरवाजा खर्क्य है परन्तु अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही ,अब क्या करो सर ………………………………? सो इ ऍम सुप्पोर्तिंग अन्ना हजारे

  5. Nirmal says:

    a true article, everytime i see things like this, it remind me of elephant, which have different teeth to show and different to eat. what if lokpal becomes corrupt, after all he will not descent frm heaven, he will be part of society only.
    let all of stop taking short cuts in our timely gains and remove corruption from within.

  6. देश में जो भी कोई भ्रष्ट है उससे पहले ये सरकार और उसके मंत्री, संत्री अधिकारी भ्रष्ट हैं । आज हिंदुस्तान में आपका कोई भी काम वह कितना ही वाजिब क्यूं न हो बिना पैसे के नही होता । एन जी ओ को भी प्रॉजेक्ट सेंक्शन करवाने के लिये नियोजित राशि का कुछ प्रतिशत िन अधिकारियों को देना पड़ता है । काम नही होगा तो ना सही पर घूस नही देंगे ये हमारा ब्रीद होना चाहिये ।

  7. पता नहीं आज क्या होता है? देखते हैं….ऊंट किस करवट बैठता है.

  8. समर्थन भी किया जाय और विवेक भी जाग्रत रखा जाय, हर्ज़ ही क्या है। सावधानी उचित परिणाम ही देगी, आंखें मूंदनें का तो कोई प्रयोजन समझ नहीं आता? इससे आंदोलन को कोई विक्षेप पहुंचने वाला नहीं।

  9. Bhushan says:

    @ सुज्ञ जी
    सहमत हूँ. समाज आँखें मूँदे तो हानि ही होती है. अन्ना का आंदोलन कई मायनों में पुराना है. एनजीओ जिस प्रकार इससे आ जुड़े हैं,उस पर नज़र रखना ज़रूरी है क्योंकि इन संगठनों से भी दृष्टि हटाई नहीं जा सकती. आप एनजीओज़ और इन्हें डील करने वाले अधिकारियों के बारे में जानते ही हैं.

  10. बेहतरीन और अलग।

  11. Apanatva says:

    jhakjhorne walee post .
    Aabhar

  12. Jyoti Mishra says:

    current situation of Indian ppl is like Sheep n goats trying to pass resolutions favoring vegetarianism when wolves have different opinion

  13. ZEAL says:

    The Shrewd and corrupt government knows very well how to decelerate and stop the momentum gained by the painful and tough fasting along with the support of million innocent people.

  14. veerubhai says:

    Wednesday, August 24, 2011
    इफ्तियार पार्टी का पुण्य लूटना चाहती है रक्त रंगी सरकार .
    जिस व्यक्ति ने आजीवन उतना ही अन्न -वस्त्र ग्रहण किया है जितना की शरीर को चलाये रखने के लिए ज़रूरी है उसकी चर्बी पिघलाने के हालात पैदा कर दिए हैं इस “कथित नरेगा चलाने वाली खून चुस्सू सरकार” ने जो गरीब किसानों की उपजाऊ ज़मीन छीनकर “सेज “बिछ्वाती है अमीरों की ,और ऐसी भ्रष्ट व्यवस्था जिसने खड़ी कर ली है जो गरीबों का शोषण करके चर्बी चढ़ाए हुए है .वही चर्बी -नुमा सरकार अब हमारे ही मुसलमान भाइयों को इफ्तियार पार्टी देकर ,इफ्तियार का पुण्य भी लूटना चाहती है ।
    अब यह सोचना हमारे मुस्लिम भाइयों को है वह इस पार्टी को क़ुबूल करें या रद्द करें .उन्हें इस विषय पर विचार ज़रूर करना चाहिए .भारत देश का वह एक महत्वपूर्ण अंग हैं ,वाइटल ओर्गेंन हैं . .
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/

  15. veerubhai says:

    Wednesday, August 24, 2011
    योग्य उत्तराधिकारी की तलाश .
    “एकदा “(नभाटा ,२४ अगस्त )में एक बोध कथा प्रकाशित हुई है “योग्य उत्तराधिकारी “ज़िक्र है राजा प्रसेनजित ने एक मर्तबा अपने पुत्रों की आज़माइश करने के लिए उन्हें खजाने से अपनी कोई भी एक मनपसंद चीज़ चुनने के लिए कहा .सभी पुत्रों ने अपनी पसंद की एक एक चीज़ चुन ली .लेकिन इनमे से एक राजकुमार ने महल के चबूतरे पर रखी “तुरही “अपने तैं चुनी .राजा प्रसेनजित ने आश्चर्य मिश्रित भाव से पूछा इस “रणभेरी “को तुमने वरीयता क्यों दी जबकी राजमहल में एक से बढ़के एक साज़ थे .”महाराज यह तुरही मुझे प्रजा से जोड़े रहेगी .हमारे बीच एक संवाद ,एक कनेक्टिविटी का सशक्त ज़रिया बनेगी .मेरे लिए सभी प्रजाजन यकसां प्रिय हैं .मैं चाहता हूँ मैं भी उनका चहेता बन रहूँ .परस्पर हम सुख दुःख बाँटें .मैं प्रजा के और प्रजा मेरे सुख दुःख में शरीक हो .राजा ने इसी राजकुमार को अपना उत्तराधिकारी बना दिया ।
    स्वतंत्र भारत ऐसे ही सुयोग्य उत्तराधिकारी की तलाश में भटक रहा है ।
    यहाँ कथित उत्तराधिकारी के ऊपर एक अमूर्त सत्ता है ,सुपर -पावर है जिसे “हाईकमान “कहतें हैं ।
    तुरही जिसके पास है वह राम लीला मैदान में आमरण अनशन पर बैठा हुआ है ।
    प्रधानमन्त्री नाम का निरीह प्राणि सात सालों से बराबर छला जा रहा है .बात भी करता है तो ऐसा लगता है माफ़ी मांग रहा है .सारी सत्ता लोक तंत्र की इस अलोकतांत्रिक हाई कमान के पास है .प्रधान मंत्री दिखावे की तीहल से ज्यादा नहीं हैं .न बेचारे के कोई अनुगामी हैं न महत्वकांक्षा ,न राजनीतिक वजन .
    यहाँ बारहा ऐसा ही हुआ है ,जिसने भी सुयोग्य राजकुमार बनने की कोशिश की उसके पैर के नीचे की लाल जाज़म खींच ली गई .बेचारे लाल बहादुर शाश्त्री तो इसी गम में चल भी बसे. ये ही वो शक्श थे जिन्होनें पाकिस्तान के दांत १९६५ में तोड़ दिए थे ।
    ब्लडी हाई -कमान ने शाश्त्री जी को ही उस मुल्क का मेक्सिलोफेशियल सर्जन बनने के लिए विवश किया .कभी सिंडिकेट कभी इन्दिकेट .इंदिरा जी ने खुला खेल फरुख्खाबादी खेला . जाज़म विश्वनाथ प्रताप सिंह जी के नीछे से भी खींचा गया .महज़ हाईकमान रूपा पात्र -पात्राएं,पार्टियां बदलतीं रहीं .अटल जी अपने हुनर से सबको साथ लेने की प्रवृत्ति से पक्ष -विपक्ष को यकसां ,बचे रहे .चन्द्र शेखर जी का भी यही हश्र हुआ .आज खेला इटली से चल रहा है .बड़ा भारी रिमोट है .सात समुन्दर पार से भी असर बनाए हुए है .सुयोग्य उत्तराधिकार को नचाये हुए है .

  16. veerubhai says:

    हमारे वक्त की आवाज़ अन्ना ,सरकार का ताबूत बनके रहेगा अन्ना .भूषन जी जहां सन् दर्भ में “अरुंधती रॉय “आ जाएँ ,रक्त रंगी लेफ्टिए आ जाएँ वहां कहने समझने को बाकी रह ही क्या जाता है .ये तमाम “राष्ट्र विरोधी “चेहरे हैं . -जय अन्ना !जय भारत !

  17. veerubhai says:

    बृहस्पतिवार, २५ अगस्त २०११
    संसद की प्रासंगिकता क्या है ?
    अन्ना जी का जीवन देश की नैतिक शक्ति का जीवन है जिसे हर हाल बचाना ज़रूरी है .सरकार का क्या है एक जायेगी दूसरी आ जायेगी लेकिन दूसरे “अन्ना जी कहाँ से लाइयेगा “?
    और फिर ऐसी संसद की प्रासंगिकता ही क्या है जिसने गत ६४ सालों में एक “प्रति -समाज” की स्थापना की है समाज को खंड खंड विखंडित करके ,टुकडा टुकडा तोड़कर ।जिसमें औरत की अस्मत के लूटेरे हैं ,समाज को बाँट कर लड़ाने वाले धूर्त हैं .
    मनमोहन जी गोल मोल भाषा न बोलें?कौन सी “स्टेंडिंग कमेटी “की बात कर रहें हैं ,जहां महोदय कथित सशक्त जन लोक पाल बिल के साथ ,एक प्रति -जन -पाल बिल भी भिजवाना चाहतें है ?संसद क्या” सिटिंग कमेटी” है जिसके ऊपर एक स्टेंडिंग कमेटी बैठी है .अ-संवैधानिक “नेशनल एडवाइज़री कमेटी”विराजमान है जहां जाकर जी हुजूरी करतें हैं .नहीं चाहिए हमें ऐसी संसद जहां पहले भी डाकू चुनके आते थे ,आज भी पैसा बंटवा कर सांसद खरीदार आतें हैं .डाकू विराजमान हैं .चारा -किंग हैं .अखाड़े बाज़ और अपहरण माफिया किंग्स हैं ।
    आप लोग चुनकर आयें हैं ?वोटोक्रेसी को आप लोग प्रजा तंत्र कहतें हैं ?
    क्या करेंगें हम ऐसे “मौसेरे भाइयों की नैतिक शक्ति विहीन संसद का”?

    समय सीमा तय करें मनमोहन ,सीधी बात करें ,गोल -गोल वृत्त में देश की मेधा और आम जन को न घुमाएं नचायें ।
    “अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल “.बारी अब तेरी है .

  18. Bhushan says:

    @ veerubhai जी,
    आपके चारों कमेंट्स से आपके भीतर की पीड़ा छलकती है.
    इन घटनाओं पर वामपंथियों की सोच अलग दिखती है. इसी प्रकार प्रत्येक बुद्धिजीवी की अपनी जानकारी होती है और इसी से उसकी सोच अलग दिखती है. इनमें अरुंधती राय महज़ एक हैं. इंटरनेट पर मैंने इस विषय पर समाचार-पत्रों में अल्पसंख्यकों, OBC, SC और ST का पक्ष रखने वाले आलेख/समाचार देखे हैं. हमारे देश का ढाँचा ही ऐसा है कि वाकई अनेकता में विविधता भरी एकता दिखाई देती है और वह जो अनेकानेक पूर्वाग्रहों/विसंगतियों से भरी है. इसे आप नियति कहेंगे या दुर्भाग्य? मैं दुर्भाग्य शब्द को सही मानता हूँ क्योंकि भ्रष्टाचार की सबसे अधिक मार झेल रहे ग़रीब अन्ना के आंदोलन से जुड़ने की स्थिति में नहीं हैं और सबसे अधिक भ्रष्टाचार/अनपढ़ता के शिकार हैं. अन्ना को व्यापक आधार कहाँ से मिलेगा? मेरी राय है कि हम इस एनजीओ भ्रातृसंघ पर अधिक विश्वास नहीं कर सकते. दूसरे, अन्ना हज़ारे बहुत महत्वपूर्ण हैं परंतु भ्रष्टाचार का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण है.

  19. sm says:

    Please read the biography of Anna.
    Talk about Janlokpal provisions.

  20. Bhushan says:

    यह टिप्पणी श्री जी.एल. भगत ने मुंबई से ईमेल द्वारा भेजी है:-

    GL Bhagat ✆ to me

    The greatest asset of the nation is socio-culture assets that it inherited from the past. Failure to implement the Article16 (4A) by the government would have saved this situation. Removal of the services of group-D from the lower rank is another serious attempt to eliminate the poor and the lower from the national main stream. Jajmani attack on the culture that ended in 9th century AD landed this nation with 33% of the present population as outcastes or dalits. The assets of these outcastes taken away by way of legal promulgation (ML Ch-1, Sec 37, and Sec-I-87 to I-108) are shining in temples of the king rut by Raj Purohit (Devalaka) higher castes which were formed and consolidated in 400 to 1900AD. The present is a creation of mental, social, physical corruption.

    There should be at least two places which should be free from Tandva Sacrifice which is a well known technique to defame a person or institution. Prime-minister and the Judicature at the top must be free from all such issue that could involve well approved methods to defame the institution provided the judicature and the administration is represented as approved in Article 16(4A).

    Move of Anna or others is a well planned attack on the implementation of Constitution of India and further crush the depressed classes. It is going to be suicidal for the nation. Sir, we are a developing nation and now the nation is covered by different socio-culture groups. Yesterday news papers have reported that Muslims should distance them from this move. Only ignorant people who are unaware of the background are there to increase the crowd and are creating the pressure on the government.

    It is a time when all sections of the nation should rationally examine so that we may not have another crusade against depressed classes in the name of this Lokpal because the implementation may not have anyone from the poor or the low. The nation must be saved from classes which are constantly making new experiments to crush the depressed sections. If all these people are sincere to nation, let them create an awareness of classless, casteless society, let them preach castes are fictitious. Let them recruit temple priests from the degraded classes. Let the forces free bonded labourer classes be educated to a minimum standard of their educational level. Hon’ble Supreme Court has already examined the results and intention of the government.
    G.L.BHAGAT

  21. Bhushan says:

    यह टिप्पणी श्री जी.एल. भगत ने मुंबई से ईमेल द्वारा भेजी है:-

    GL Bhagat ✆ to me

    There were 450 princely states that are running the nation in pre-constitution period and have similar gold or diamond and immovable assets as Padmanabha temple. How many have handed over the assets to national exchequers? They are enough the control the constitution and parliamentarian at their sweet will through hooligans by creating Tandva. Only Religious Commission can save such a democratic institution that may separate all religious matters including the religious assets and other aspects. Without proving failure of the different departments, creation of the new bill needs to be examined at length before it is put to use in public.

    The national law declares a caste free nation. Let us restore the properties that are earlier looted by way of implementation of jajmani rule from the present dalits. Was not the previous national law “a Lokpal” that made the present humanity of outcastes, SC/ST/ OBC or other graded classes or the present BPL? Recorded facts are available on the national history and well preserved in all national and international libraries. National law i.e. Constitution of India is under sever attack from the different angles.

    A sense of social awareness, national feeling and future of the nation may be top priority of the Parliamentarians and National Judicature. Past experience and future tendencies are not showing favorable signs. We must have a corruption free nation and that too all type of corruption i.e. social, moral, human-graded and financial. To me it appears a defined Tandva well explained in Ancient History of India by Mahajan. It is a dangerous sign for democracy. By giving his mind to talk a few persons, he is acting as a king maker. All such exercises of the past have confirmed the erosion of national law. The democracy and its constitution are at stake. Social thinkers of the nation must come forward on the issue to save the constitution from destruction. However, it is a great movement.

    G.L.BHAGAT

  22. Bhushan says:

    I have seen it on Face Book:-

    “Now Bahujan Civil Society
    by Udit Raj on Friday, August 26, 2011 at 12:38am

    Now social society of dalits, backwards and minorities (civil society of bahujan) is floated which will be announced tomorrow, 26 august, 2011 in press club of India at 3:00 PM, N Delhi and Dr. Uditraj and other leaders will announce it. We have Bahujan Lokpal Bill and they have Jan Lokpal Bill. We had crowed / rally of 70 000 on 24 August at India Gate and they too had crowed. We are not less than anyone in so far as to protect our rights and constitution. Pl circulate it others and those who wants to come to the press club of India, is welcome.”

  23. शुभकामनायें ..

  24. There is always the other side of the coin. Anna's movement means different things to different people. Opportunists are also trying to reap their harvest.

  25. G.N.SHAW says:

    we have to watch and be prepare for next revolution during election >if all is correct . thanks sir.

  26. veerubhai says:

    Friday, August 26, 2011
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/
    “बद अच्छा ,बदनाम ,बुरा
    बिन पैसे ,इंसान बुरा ,
    काम सभी का ,एक ही है ,पर मनमोहन का नाम बुरा .——“-प्रधान मंत्री जी कह रहें हैं मैंने ४१ बरस इस देश की सेवा की है .इनमें से २० बरस मैंने संसद में बिताये हैं .अपनी पूरी योग्यता से मैंने देश की सेवा की है .मुझ पर आज लोग ऊंगली उठा रहें हैं .नेता विपक्ष मेरी और मेरे परिवारियों की इस दरमियान जुटाई गई संपत्ति की जांच कर सकतें हैं .
    मान्यवर हमारे बुजुर्ग कह गएँ हैं -“बद अच्छा बदनाम बुरा “.आपकी उठ बैठ ,सोहबत खराब है ,स्विस बेन्कियों की आप जी हुजूरी कर रहें हैं और स्विस कोष की हिफाज़त .आपकी निष्ठा “मम्मीजी “के साथ है .उस मंद मति बालक के साथ है ,जो इस अकूत संपत्ति का उत्तराधिकारी है .आप कहतें हैं मेरा कुसूर क्या है ?आप इसी बालक के लिए “हॉट सीट “का अनुरक्षण कर रहें हैं .
    ram ram bhai

    शुक्रवार, २६ अगस्त २०११
    राहुल ने फिर एक सच बोला .
    http://veerubhai1947.blogspot.com/
    शुक्रिया अन्ना भूषन जी ,आपके स्नेहाशीष से ही लिखा जा रहा है .विविधता पूर्ण देश को सलाम .

  27. Bhushan says:

    This comment is sent by Mr. Sushil Rajvanshi-
    sushil rajvanshi ✆ to me

    “In my opinion this is fight against corruption. The most of the countrymen are sufferers particularly people at lowest rung of the society who have neither money to pay nor political approach for getting their legitimate work done. I do not see any conspiracy from any quarter to divert attention from any issue in thee country. However, while constituting the agency against corruption appropriate representation (particularly SC/ST) should be given in the body to avoid biases in decision making.
    Sushil Kumar

  28. good discussion is going on 🙂

  29. भ्रष्टाचार से मस्त नेताओं ने फिर वही गंदा खेल खेलने का प्रयास किया “लड़ाओ और राज करो”। भ्रष्टाचार का जाति या धर्म से क्या संबंध ?
    सविधान बचाओ !! इतने सालो में क्या भला किया इस सविधान ने जो आज इसकी रक्षा की बात की जा रही है ॰

  30. Bhushan says:

    @ डॉ महेश सिन्हा जी
    भ्रष्टाचार का जाति से संबंध न होता तो अन्ना की ही रैली में जातिवाद का बोलबाला न होता. आप यहाँ देख सकते हैं- अन्ना हज़ारे . अन्ना का दायित्व था कि ऐसे तत्त्वों को अपनी रैली से दूर रखते. दूसरे, हमारे देश की ब्यूरोक्रेसी और राजनीति जानती है कि कि सरकार द्वारा दलितों के लिए बनाई गई योजनाओं के लिए दिया गया धन कैसे भ्रष्टाचार की भेट चढ़ता है और कोई सुनवाई भी नहीं होती. वास्तविकता यह है कि भ्रष्टाचार का एक बहुत बड़ा हिस्सा जाति आधारित है.

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