Om Puri – अर्द्धसत्य का पूर्णसत्य

ओम पुरी जी, बल्ले…बल्ले…कमाल कर दी. फिक्र नहीं, कह दी तो कह दी.
अर्द्धविराम का पूर्णविराम होता है तो अर्द्धसत्य का पूर्णसत्य भी होता है जो तुमसे कल सुना. अण्णा हज़ारे के मंच पर और अण्णा के पास खड़े हो कर तुमने हाज़मा ख़राब करने वाली बातें बोलीं. अच्छा हुआ कि टीम अन्ना ने तुम्हारे हाथ में माइक दे दिया वरना यह सत्य सुनने को नहीं मिलता. सांसदों को अनपढ़-गँवार-नालायककह पाना सिर्फ़ तुम्हारे बस का था.
मैंने अपनी उलटी खोपड़ी से अण्णा पर आलेख लिखा था. उसके लिए लिंक ढूँढते-ढूँढते दिमाग़ी खुश्की हो गई थी. उसे दूर करने के लिए टीवी खोला कि तुम दिखे, मैं देखने लगा. याद आया कि एक बार चाय पी कर तुम्हारे पेट में खूब हवा बनी थी. एक्टरों के पेट ऐसे ही होते हैं. इसी लिहाज़ से तुम्हारा पूरा भाषण सुन लिया क्योंकि पता था कि आगे क्या होने वाला है.
तुम्हारे स्टेज शो के बाद एक अत्यंत कुलीन राजनीतिज्ञ ने अपनी बिरादरी की भावनाएँ व्यक्त करते हुए अति आहत स्वर में लंबा वक्तव्य दिया. उसे खेद था कि अण्णा के मंच से यह क्यों कहा गया, वह भी टीवी कैमरे के सामने, वह भी लगातार, वह भी अर्द्धसत्यके पुलिसिए के मुँह से. कइयों ने नाक पर रूमाल रख लिया. समझे क्या?
कई वर्ष पहले अर्द्धसत्यमें भूमिका निभाते समय तुम्हारे मन में जो उमड़ा-घुमड़ा वह आज मुँह से उगल आया (भूमिकाएँ करने के बाद एक्टरों को ऐसी समस्या आती है). पंजाबी कहावत है कि मुँह में आई बात को रोकना नहीं चाहिए. और फिर कह दिया तो कह दिया !!!  ‘वास्तविकता की मात्रा कुछ ज़्यादा हो गई. ब्रेख़्त को समझने में ग़लती हुई होगी कि Reality ज़रा ultra reality हो गई या फिर डायलॉग सलीके से याद नहीं किए होंगे. इट्स ओके यार !! भविष्य में डायलॉग तैयार करके बोलना. डोंट बी अपसेट. वैसे मैं खुद बहुत अपसेट हूँ.
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7 Responses to Om Puri – अर्द्धसत्य का पूर्णसत्य

  1. ओम पुरी ने कहा क्या, यह तो पता नहीं चला।

  2. अर्द्धसत्य का पूर्णसत्य पसंद आया

  3. Pallavi says:

    बढ़िया पोस्ट सर… मैंने भी सुना और देखा था दोनों को कहते….

  4. Vijai Mathur says:

    खुद क्यों नहीं मैदान मे आते। हवा मे तीर चलाने से क्या कोई तीरंदाज होता है?

  5. veerubhai says:

    संसद को इस पर भी विचार करना चाहिए .
    सांसद एक छोटे से भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है ,भले वह बाजू बल ,झूठ बल ,जाति- बल, छल कपट फरेब से जीत कर संसद में चले आने में कामयाब रहता है .आने को फूलन देवी जी भी संसद में आ गईं थीं .आज भी अनेक चोर उच्चके संसद में आ गएँ हैं .सविधान निर्माताओं ने सोचा नहीं होगा एक दिन पशुओं का चारा भी हजम करने वाले संसद में आ जायेंगें .और यहाँ आकर मजमा लगायेंगें ,चुटकले सुनायेंगे ,देश की नैतिक शक्ति और बल का उपहास उड़ाएंगें ।
    सवाल आज यह मुखरित है :आम आदमी का पैसा ऐसे लोगों पर क्यों अपव्य किया जाए .जो संसद में आके चुटकले सुनातें हैं .जोकर की भूमिका निभातें हैं .पान का बीड़ा मुंह में लगाके गोल गोल घुमातें हैं .भाषा को भ्रष्ट करके बोलतें हैं ।
    और अगर संसद में ऐसे जोकरों की ज़रुरत कभी कभार पड़ती है तो वह बाहर से भी बुलाये जा सकतें हैं .किराए पर पैसे देकर .उन्हें पहले तनखा और बाद में ताउम्र पेंशन देने की कहाँ ज़रुरत है .
    और अगर लचर कानूनी प्रावधानों की आड़ में आ ही गए हैं ,नैतिकता को ताक पे रखके तो संसद के स्पीकर को लालू जैसे प्राणियों को राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलने का हक़ नहीं देना चाहिए ।
    निर्बुद्ध लालू जी को यह समझ ही नहीं आता क़ि नैतिक बल अश्व बल से,संख्या बल से ,वोटों के सिरों सेबहुत बड़ा होता है .लालू जी का दुर्भाग्य जिस जनता की अदालत में जाने की बात ,बात- बात में वह करतें हैं उसी जन अदालत का कल संसद में अपमान कर गए जिसके प्रतिनिधि आज देश की नैतिक ताकत के प्रतीक अन्ना जी हैं .
    माननीय अन्ना जी ने संसद में “जन लोक पाल “मुद्दे पर लालू के अनर्गल प्रलाप का जो करारा ज़वाब दिया है हम तो वहां तक सोच भी नहीं सकते-“लालू जी आपका काम बच्चे पैदा करना है ,आप क्या जाने ब्रह्मचर्य व्रत क्या होता है ।उसकी आंच क्या होती है .
    संसद के लिए यह विचारणीय होना चाहिए आइन्दा के लिए संसद के फ्लोर पर ऐसे जोकरों को उतारकर संसद की ठेस न लगने दी जाए .

  6. veerubhai says:

    दम चाहिए सच बोलने के लिए ,ओमपुरी जी “स्टार “नहीं है ” अभिनेता “हैं ,स्टार को बौना बनाने वाला .उनके वक्तव्य से पूरी तरह सहमत अलबत्ता “काने” को यह कहना ज्यादा समीचीन है”भाई साहब आप तो सब को एक ही नजर से देखतें हैं ,दुर्मुख /मूडमति अनेक अलंकरण हैं इन महान आत्माओं के लिए .ज़बान गन्दी क्यों की जाए ?

  7. अर्द्धसत्य की पूरी जानकारी मिला आपके ब्लॉग पर आकर
    ……आभार भूषण जी

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