‘Anna Effect’ – ‘अन्ना प्रभाव’

Though it is premature to say so but it can still be said that a sort of ‘Anna Effect’ is now prevailing over industrial circles. There is a talk going on that atmosphere for local as well as foreign investments has immediately been affected. Industrialists are pondering over methods to deal with the coming up situation. The work which used to get accomplished through gratification has now more possibilities of falling on either side of the track. Their worries have multiplied due to non-granting of bail to the industrialists and politicians by the courts under tremendous public pressure. Rapists may get bail but these people may not. Previously in cases like that of Harshad Mehta, wherein Rs.3500 crores scam was involved, the maximum sentence was 6 months.  That was the rule even before independence and suited The English. This also suits our local Angrez. They just pocket crores of rupees and visit the jail for joy. And then they live happily thereafter. It had been fun for them to go to jail, but not now. They will try to avoid long stay in jail. 

Good-Good-Good!!! It is ‘Anna Effect’.

यद्यपि यह कुछ जल्दबाज़ी है परंतु कहा जा सकता है कि एक प्रकार का अन्ना प्रभाव उद्योग जगत पर तारी हो गया है.  सुनने में आया है कि स्थानीय और विदेशी निवेश के लिए वातावरण तुरत प्रभावित हुआ है. उद्योगपतियों में चर्चा हो रही है कि आने वाली स्थिति से कैसे निपटा जाएगा. जो कार्य पहले ले-दे की सरल प्रणाली से हो जाते थे उनमें अब व्यवधान पड़ने की कई संभावनाएँ पैदा हो गई है. तिहाड़ में बंद कुछ उद्योग वालों और राजनीतिज्ञों को पब्लिक के दबाव में न्यायालयों से ज़मानत न मिलने के कारण उनकी चिंताएँ और बढ़ी हैं. बलात्कारियों को ज़मानतें मिल सकती हैं लेकिन इन्हें नहीं मिल रही हैं. पहले स्थिति ऐसी थी कि हर्षद मेहता जैसे मामले में, जिसमें शायद 3500 करोड़ रुपए की लिप्तता थी, अधिकतम सज़ा छः महीने की जेल थी. यह अंग्रेज़ों के समय का नियम है जो उस समय के अंग्रेज़ों को माफ़िक था. आज के काले अँग्रेज़ों को भी माफ़िक है. करोड़ों हड़पे और कुछ महीने जेल में रह आए. फिर मज़े ही मज़े में रहे. जेल जाना उनके लिए खेल था, अब खेल नहीं रहेगा. लंबी अवधि की जेल से सभी बचना चाहेंगे.  

बहुत ही बढ़िया है! यह अन्ना प्रभाव है!!

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Born on January, 13, 1951. I love my community and country.
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15 Responses to ‘Anna Effect’ – ‘अन्ना प्रभाव’

  1. जेल अगर पाँचसितारा होटल हो तो लम्बा क्या?

  2. रेखा says:

    अभी तो बहुत कुछ और भी होना है ……यह स्थिति यों ही कायम रहे

  3. veerubhai says:

    Anna effect has just begun .It has to go long way .Election reforms is a big issue .AH !Now the Kalmadees ,The kanimauzees and their kith and kin will not be able to convert “Tihaad “into a constituency .Good posr .The work has just begun .Thanks for this update .

  4. I am in support of Anna.
    Now,see what happens.

  5. पहली बार आपके ब्लॉग पर आया. आपके सारे पोस्ट पढ़े. अफ़सोस है की पहले क्यों नहीं यहाँ आ पाया.
    हम ये बात अच्छी तरह जानते हैं कि किसी भी नेता ने खुले मन से अन्ना का समर्थन नहीं किया है, ये तो जनाक्रोश था जिसके डर से आप मजबूर हुए हैं.
    हमारे पास कोई मोहिनी अस्त्र तो है नहीं की उसे चला दिया और सबकी सोच बदल गई. इसके लिए एक बदलाव की आवश्यकता है और मुझे लगता है उसकी शुरुआत हो चुकी है.
    जब गांधीजी ने अंग्रेज़ों से भारत छोड़ने के लिए कहा था तो एक बड़े बुद्धिजीवी वर्ग को ऐसी आशा नहीं थी, लेकिन ऐसा हुआ.
    इस आंदोलन से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा ये तो अन्ना को भी पता है, लेकिन नकेल ज़रूर पड़ जाएगी ये हम सबको पता है.

  6. अन्ना effect की जय हो ! बहुत बढ़िया विश्लेषण !

  7. Sunil Kumar says:

    कुछ तो ज़रुर होगा यह आन्दोलन व्यर्थ नहीं जायगा ….

  8. Pallavi says:

    आज हमारे देश में जो हालत हैं उनको मध्य नजर रखते हुए बस इतना ही कहना चाहूंगी की “यह तो सिर्फ अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है”

  9. Vivek Jain says:

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,

    एक चीज और, मुझे कुछ धर्मिक किताबें यूनीकोड में चाहिये, क्या कोई वेबसाइट आप बता पायेंगें,
    आभार- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

  10. Jyoti Mishra says:

    Anna effect is very effective 🙂
    at least for now it can be sensed everywhere !!

  11. जैसे ही आसमान पे देखा हिलाले-ईद.
    दुनिया ख़ुशी से झूम उठी है,मना ले ईद.
    ईद मुबारक

  12. जो पीते थे खून जनता का अब वो नेता चूस रहे हैं गन्ना
    क्यूंकि उनको मज़ा चखाने अब आ गए हैं हमारे अन्ना

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,

  13. आदरणीय भूषण जी,
    नमस्कार,
    आपके ब्लॉग को “सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगसपाट डाट काम” के “हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज” पर लिंक किया जा रहा है|

  14. Rachana says:

    abhi to thda achchha huaa hai .abhi bahut kuchh hona baki hai hoga jarur hoga
    dhnyavad
    rachana

  15. आगे-आगे देखें होता है क्या..

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