Shiv Kumar Batalvi and Jagjit Singh शिव कुमार बटालवी और जगजीत सिंह

(कल स्व. शिव कुमार बटालवी पर इस पोस्ट का ड्राफ्ट तैयार किया था. आज पता चला कि जगजीत सिंह का भी निधन हो गया है. अब यह पोस्ट दोनों की पुण्यस्मृति को समर्पित है).

शिव कुमार बटालवी
जगजीत सिंह

बटालवी पंजाबी के अमर साहित्यकारों में गिने जाते हैं. इनकी मृत्यु से कुछ समय पूर्व इनसे एक गीत सुनने को मिला था- की पुछदे हो हाल फकीराँ दा, साडा नदियों विछड़े नीराँ दा. तब इनकी तबीयत खराब चल रही थी लेकिन बुलंद आवाज़ में अथाह पीड़ा भरी थी. तब मैंने अपने एक मित्र से कहा था कि यह शायर मौत पर नहीं गाता बल्कि मौत को गाता है. कल बटालवी का लिखा एक गीत सुना जिसे जगजीत सिंह ने गाया है. उसका हिंदी अनुवाद यहाँ दे रहा हूँ. अनुवाद में थोड़ी छूट ली है ताकि बहर कुछ बनी रहे.

रोग बन के रह गया है प्यार तेरे शहर का
मैंने देखा है मसीहा बीमार तेरे शहर का
तेरी गलियों ने मेरी चढ़ती जवानी लील ली
क्यों करूँ मैं दोस्त अब सत्कार तेरे शहर का
बाद मरने के जहाँ कफ़न न होता नसीब
कौन पागल अब करे इतबार तेरे शहर का
लाश तक मेरी यहाँ नीलाम कर डाली गई
नहीं उतरा कर्ज़ फिर भी यार तेरे शहर का

ऊपर दी गई ग़ज़ल का यू-ट्यूब लिंक नीचे दिया है. दोनों की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना है. दोनों की जुगल बंदी से रची यह रचना इन्हें समर्पित है.

1976 में पंजाब यूनीवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडियन थिएटर की लेक्चरर रानी बलबीर कौर ने बताया था कि पंजाबी लोकगीत ‘काला डोरिया कुंडे नाल अड़िया इ ओए…कि छोटा देवरा भाभी नाल लड़िया इ ओएके रचयिता शिव कुमार बटालवी ही हैं. यदि यह सच है तो निश्चित जानिए कि अपने जीते जी एक ऐसा गीत लिख जाने से बढ़ कर रचनाकार के लिए और कौन-सी संतोषदायक चीज़ हो सकती है.

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Born on January, 13, 1951. I love my community and country.
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13 Responses to Shiv Kumar Batalvi and Jagjit Singh शिव कुमार बटालवी और जगजीत सिंह

  1. जगजीत के बारे में अभी यहीं से पता चला। बहुत बुरी खबर है…

  2. Pallavi says:

    सच बहुत बुरा हुआ जगजीत सिंग जी के जाने से संगीत की दुनिया ने जो खोया है, उसकी भरपाई शायद ही कभी हो पाये शिव कुमार जी और जगजीत सिंग जी दोनों को ही मेरे जैसे अन्य गजल प्रेमियों की तरफ से अश्रुपूर्ण विनम्र श्र्द्धांजली ….

  3. रेखा says:

    बहुत ही दुखद समाचार है …शिव कुमारजी और जगजीत सिंहजी को भावभीनी श्रधांजलि

  4. बहुत अच्छी पोस्ट बनाई है सर!
    बटालवि जी और गजल सम्राट जगजीत सिंह जी को हार्दिक श्रद्धांजलि।

    सादर

  5. विनम्र श्र्द्धांजली ….

  6. कल 12/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  7. आपने बटालवी जी की याद दिला दी…

    आभार.

  8. विनम्र श्रद्धांजलि दोनों दिव्यात्मा को . सच ! स्थान रिक्त हुआ है..

  9. Nishant says:

    जगजीत साब के जाने का तो सोचा भी न था. लग रहा था चंद रोज़ अस्पताल में रहके आ जायेंगे.
    बटालवी जी का अनुवाद बेहतरीन है. उनके गीतों-गजलों का लुत्फ़ वे बेहतर ले सकते हैं जो पंजाबी अच्छी जानते हैं.
    मेनू तेरा शबाब ले बैठा…. बेहतरीन है… सैंकड़ों बार सुनी है.

  10. anupama says:

    बटालवि जी और जगजीत सिंह जी को श्रद्धांजलि।

  11. बटालवि जी और जगजीत सिंह जी को हार्दिक श्रद्धांजलि।

  12. LastRegan says:

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