Monthly Archives: April 2012

Sachin Tendulkar – A great politician – सचिन तेंदुलकर – एक महान राजनीतिज्ञ

अमां….चोरी-चोरी चुपके-चुपके. सोनिया आँटी के साथ एक बैठक और ‘मैं यहाँ हूँ, यहाँ हूँ, यहाँ हूँ….वहाँ…..(राज्यसभा)’. महान राजनीतिज्ञ हो, सच्चिनन्न्न्न्न् ! घोषणा होते ही राजनीतिक पार्टियों ने तुम्हारे राज्यसभा में आने का स्वागत चौड़ी बत्तीसी से किया. अगले दिन दिमाग़ … Continue reading

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I shall live here Prof. Stephen Hawking – प्रो. स्टीफन हॉकिंग! मैं यहीं रहूँगा

Sometimes many things start joining in the mind and, though irrelevant, start giving a specific meaning. For the past few days I was in a sad mood. Now, at this age reasons for sadness are not to be told. Of … Continue reading

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We exist in songs – गीतों में हम हैं.

कई वर्ष पहले मैंने ‘मेघ’ शब्द इंटरनेट पर ढूँढा. मंशा थी कि बिरादरी के बारे में शायद कुछ जानकारी मिले. मगर कुछ नहीं मिला. ‘मेघ’ सरनेम वाले एक अमरीकन की वेबसाइट मिली. वह उद्योगपति था. लेकिन वह काफी गोरा था. … Continue reading

Posted in रचनात्मक, Desraj Kali, Uncategorized, Unity | 2 Comments

Hello dear omniscient – हैलो जी अंतर्यामी जी !!

जी, यह पोस्ट आप ही को संबोधित है. ज़रा लंबी पोस्ट है लेकिन इसे पढ़ना आपको अच्छा लगेगा क्योंकि इसमें जो भी है वह दिव्य है. अपने कई संबंधियों, मित्रों और ब्लॉगरों से उनके दिव्य सपनों, दिव्य दृष्टि, दैवी दृष्यों, … Continue reading

Posted in बाबा फकीर चंद, रचनात्मक, Baba Faqir Chand, David C. Lane | 20 Comments

Beyond the principles of profession – धंधे के उसूलों से परे

15-20 दिन पहले मैंने एक निर्मल बाबा को अपने सोशल नेटवर्क अकाऊँट से बाहर किया था. पता नहीं वह कौन था. लेकिन आजकल एक निर्मल बाबा चर्चा में हैं. अस्तु. बाबा लोगों का कारोबार मूलतः ‘चर्चा’ से चलता है. लोग … Continue reading

Posted in धर्म, निर्मल बाबा, रचनात्मक | 4 Comments

When we became independent in 1947… – जब हम 1947 में आज़ाद हुए थे…..

…..उससे पहले एक कानून था कि यदि कोई शराब पीकर किसी की हत्या कर दे तो उसे कम सज़ा दी जाती थी क्योंकि माना जाता था कि नशे में होने के कारण उससे ग़लती हो गई. यह कानून अंग्रेज़ों ने … Continue reading

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महिलाराष्ट्र – हमार कोई का करिहै

एक पुराना गीत था- ‘अपने सैंया से नैना लड़ैबे, हमार कोई का करिहै’. वह आदर्श समय था- पुरुषों के लिए. कुछ वर्ष पूर्व एक लोकप्रिय पत्रिका में आलेख पढ़ा था जिसका थीम था कि पति को टाँग कर कैसे रखें. … Continue reading

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