Monthly Archives: May 2012

Advocates are ruling – वकीलों का राज है भई

Advocates टीम केजरीवाल ने 15 मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. आरोप लगाने वालों में और आरोपी मंत्रियों में बहुत से वकील हैं. ओह! (सांसद वकील)-बनाम-(एनजीओ वकील) की सनसनी. मैं बहुत प्रभावित हूँ. सांसदों के रूप में (आ)रोपित वकील मंत्रियों/सांसदों … Continue reading

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Team Anna, Team Kejriwal, Team Advocates – टीम अन्ना, टीम केजरीवाल, टीम एडवोकेट्स

जिसे टीम अन्ना कहते हैं उसकी संक्षिप्त मूल-कथा यह है कि इसके मूल में अरविंद केजरीवाल है. अति महत्वाकांक्षी. इसने एक इच्छा के तहत अन्ना हज़ारे का दरवाज़ा खटखटाया. अन्ना दरवाज़ा खोल बैठे. सीन बदल गया. अब अरविंद मोटा गया … Continue reading

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A lullaby – a prayer apprehensive – एक लोरी – एक दुआ आशंकित सी

हर पल का शायर – साहिर लुधियानवी फिल्मी सिचुएशनों पर साहिर लुधियानवी ने कमाल के गीत लिखे हैं. ‘मुझे जीने दो’ फिल्म में एक डाकू की पत्नी अपने बच्चे को लोरी सुना रही है और उसे जवान होने की दुआ … Continue reading

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Manmohan not speaking – मनमोहना ! बड़े झूठे.

भारत में मनमोहनियन अर्थशास्त्र के प्रणेता की मानें तो अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों ने डॉलर को रुपए के मुकाबले मज़बूत कर दिया. सो पैट्रोल की कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो गया था. जनता का रुपया पसीने से तरबतर हो गया.   सवाल … Continue reading

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IPL, Bollywood movie and American star – आईपीएल, बालीवुड मूवी और अमेरिकी हीरोइन

टीवी पर आईपीएल की ख़बरें देख कर भीतर का गब्बर सिंह चहक उठा- अब आएगा मज़ा खेल का. सीन एक कीर्ति आज़ाद को आईपीएल की कथा में हिंदी फिल्म दिखी जिसमें हीरो, हीरोइन, विलेन सब कुछ था. फिर विलेन ने … Continue reading

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Cricket and corruption – क्रिकेट और भ्रष्टाचार

पियक्कड़ देवदास का एक मशहूर डायलॉग है, “कौन कमबख़्त कहता है कि मैं जीने के लिए पीता हूँ?” अधिया चढ़ा चुका क्रिकेटर भी शायद सच बोल बैठे, “कौन कमबख़्त कहता है कि मैं देश के लिए खेलता हूँ.” माँ-बाप बच्चों … Continue reading

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Cartoon of Ambedkar – अंबेडकर का कार्टून

केशव शंकर पिल्लै रचित कार्टून संसद हंगामों की राजधानी होती है. कोई किसी की टाँग खींचता है तो कोई किसी का कुर्ता, कोई किसी का कान खींचता है तो कोई किसी की लंगोटी खींचने को आतुर होता है. कार्टूनिस्टों के … Continue reading

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