Markesh of Indian Politics – भारतीय राजनीति का मारकेश

राजीव गाँधी युवा नेता थे इसलिए उनके जीवन के बारे में भविष्यवाणियाँ करने की चाहत ज्योतिषियों को होती रहती थी, कर दो यार! कर दो भविष्यवाणी! यह तो अपना लंबी रेस का घोड़ा है. सर्वोत्तम गणना के साथ उनके उज्जवल भविष्य की भविष्यवाणियाँ की गईं थीं. उनकी हत्या के बाद उन्हीं ज्योतिषियों ने कहा कि वे नहीं जानते थे कि राजीव के पीछे मारकेश लगा था. 

बड़े परिप्रेक्ष्य में मारकेश से तात्पर्य केवल मारने वाला नहीं बल्कि पूरी तरह चौपट कर डालने वाले से भी है. पिछले कई वर्षों से भारतीय राजनीति में सक्रिय एक चौपटकार ने कई धुरंधर राजनीतिज्ञों के करियर की चौखट हिलाई है. सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री बनने के बहुत पास पहुँच गई थीं. लेकिन अंततः उनकी अंतरात्मा नहीं मानी.

फिर समय आया कि ए. राजा को जेल जाना पड़ा जो उनके राजनीतिक करियर की भयंकर दुर्घटना थी. घटना स्थल पर चौपटकार की डेडली मुस्कान दिख रही थी जिसकी चमक चिदंबरम पर पड़ी तो कई राजनीतिज्ञ मित्रों के मुँह से निकल गया, अरे चिदांबरम भी.” ‘चिदांबरम (चिता+अंबरम् – मित्रों के उच्चारण के अनुसार सही वर्तनी)- मित्रों ने भी चौपट ही किया.

प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रपति पद के लिए पर्चा भरा तो लाभ के पद पर होने का एक संदर्भ चौपटकार की परछाईं की तरह वहीं बैठा था. मामला कोर्ट पहुँचा. बिना ‘ऊँ-आँ’ किए संसद में धाराप्रवाह बोलने वाले दादा एक बार तो हकलाने लगे.

राजनीति और विधि के क्षेत्र में मारकेश हमेशा होते हैं जो अपनी मारक क्षमता का सशक्त परिचय यदाकदा देते रहते हैं. 

चौपटकार की मुस्कान का ही प्रताप है कि सोनिया का त्याग अब मजबूरी दिखने लगा है. बाकियों का क्या होगा पता नहीं. ये जिसके पीछे पड़ते हैं हाथ धो कर पड़ते हैं. नीचे दिए दो यू-ट्यूब लिंक्स पर आप भारतीय राजनीति के इस चौपटकार के दर्शन कर पाएँगे. जय हो भगवन् !


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Born on January, 13, 1951. I love my community and country.
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5 Responses to Markesh of Indian Politics – भारतीय राजनीति का मारकेश

  1. सदा says:

    एक मारकेश (चौपटकर्ता) राजनीति और विधि के क्षेत्र में बैठा है जिसने अपनी मारक क्षमता का कई बार सशक्त परिचय दिया है. बहुत सही कहा आपने … आभार

  2. सुबरमानियम स्वामी ने मोरारजी देसाई को माईकल हर्षमेन के खिलाफ यू एस ए मे उस मुकदमे मे भिड़ा दिया जिसमे वह हार गए। अर्थात यह सिद्ध हुआ मोरार जी इन्दिरा मंत्रिमंडल मे CIA एजेंट थे। फिर सुबरमानियम ने चंद्र शेखर को बाबू जगजीवन राम के विरुद्ध खड़ा कर दिया जब मोरार जी के बाद जगजीवन बाबू पी एम बन सकते थे। चंद्र शेखर के मंत्रिमंडल मे कानून मंत्री की हेसियत से इसी सुबरमानियम ने बोफोर्स सौदे मे क्वाटरोची को बचने का रास्ता निकाला था। यह RSS/CIA का एजेंट जिसको जो मर्जी आए नहीं कहता है बल्कि संघ और यू एस ए के इशारे पर पेंटरे बदलता रहता है। उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।

  3. आपका आभार सीमा जी.

  4. हा हा हा हा…आपके द्वारा दी गयी इस जानकारी ने चौंका दिया है. आपका आभार.

  5. जय हो चौपटकार का चक्रव्यूह सृजन..

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