शुभम् ….प्रणव दा के नाम

बड़ी पुरानी कहावत है- यथा राजा तथा प्रजा जिसे लोकतंत्र में यों कहा जा सकता है- यथा राष्ट्रपति तथा जनता. कहते हैं कि दादा की यादाश्त बहुत कमाल है. इससे एक आशा जगी है कि प्रणव के रहते अब सरकार के कार्यों के बारे में जनता की याददाश्त अच्छी हो जाएगी.   😉
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10 Responses to शुभम् ….प्रणव दा के नाम

  1. तब तो चूरन (यादाश्त की) बेचने वालों के लिए बुरी खबर है .

  2. शायद अब ऐसा ही हो :))

  3. केंद्र मे गैर भाजपा/गैर कांग्रेस सरकार बनने मे इनकी बड़ी भूमिका रहेगी।

  4. आपकी बात में एक बात है तो विजय जी :))

  5. This comment has been removed by the author.

  6. दादा के आने से उम्मीद तो है कि हमारी यादें हमारे साथ रहेंगी.

  7. याददाश्त अच्छी हो जाएगी…. लगता तो है

  8. जो बातें भूलने लायक हैं, वो भी नहीं भूलेंगी !:)

  9. हा..हा..हा..हा… बढ़िया कही महेंद्र जी.

  10. भगवान जाने क्या होगा………

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