Coal, lion and Baba – कोयला, सिंह और बाबा

कोल ब्लॉ(ग)क  🙂

भारत के कोयले में आग लगी है और धुँआ अमेरिका तक चला गया है.

कोयले की दलाली में मुँह काला. यह मुहावरा उतना ही पुराना है जितनी इस क्षेत्र की खुदाई, आबंटन और दलाली. जिस महिला ने पहली बार कोयले से चूल्हा जलाया था उसने इसकी कीमत पहचानी थी. फिर मेरे मोहल्ले ने कोयले की चमक जानी थी जब कल्लू सुबह-सवेरे दाँतों को कोयले से मांज कर मुस्कराता था. तब कोलगेट वाले दाँत उसके सामने पानी भरते थे. बाकी की कहानी अब सभ्य समाज कोयले की खबरों में देख रहा है. देश के ज़िंदा संभ्रांत रजवाड़े कोयले की दलाली में अपने हाथ-मुँह काले करते हैं और विभिन्न राजनीतिक पार्टियाँ उन्हें साबुन-तौलिए देती हैं कि ये लो भइया, हमारा ध्यान रखना.
एक गोरी अमेरिकी पत्रिका ने मेरे श्याम शेड हो चुके नेता के बारे में जो भी लिखा है, मैं उसे कैसे मान लूँ? वह पत्रिका है, अमेरिका तो नहीं है न? यह बात और है कि अमेरिकी नीति बहुत साफ़ है कि कोई व्यक्ति जब लाभकारी न रहे तो उसे अपने व्याकरण के अनुसार थर्ड पर्सन, सिंग्युलर नंबर और न्यूटर जेंडर में डाल दो. बात ख़त्म. तब स्वतः ही वहाँ की पत्रिकाएँ उस पर अपनी स्लैंग मारने लगती हैं.

इधर 1992 से अंग्रेज़ी मीडिया में छाए रहे मोनी बाबा ने ढँग की हिंदी कभी नहीं सीखी. तो पंजाबी में पूछा, “हैलो बाबा, इसका मतलब तो बताइए कि पुत्त जम्मेया सी गुड़ वंडिया सी (हिंदी: पुत्र जन्मा था, गुड़ बाँटा था). इसका अर्थ अपनी माँ-बोली में ही बता दो. कुछ भी कह दो. समझने वाले सभी यहाँ से जा चुके हैं.लेकिन नहीं.

दूर जंगल में रहने वाले इस मोनी बाबा के बारे में कहा गया कि न वे बोलते हैं और न ही उनका मुँह नज़र आता है. अब जब जंगल कोयले की ग़र्द और धुँए से आच्छादित हो गया तो लोगों ने कान उधर किए, वे अब खाँसेंगे ज़रूर. पर नहीं. केवल मिन….मिन की आवाज़ आई. फिर एक महिला चीखी, रक्षात्मक होने की ज़रूरत नहीं. इस काले धुँए में सभी ‘सिंह’ दहाड़ेंगे. दहाड़ने वाले सिंह तो लुप्त हो चुके हैं.  

कोयले की तहों में फँसी दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ अब लाख दहाड़ने की कोशिश करें, लोगों के कान ‘म्याऊँ-म्याऊँ’ को पहचान रहे हैं. 

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31 Responses to Coal, lion and Baba – कोयला, सिंह और बाबा

  1. इटेलियन सैलून में, कटा सिंह नाखून |
    पुत्र जन्म पर बट चुका, सन पैतिस में चून |
    सन पैतिस में चून, मोहिनी सूरत भाई |
    भाई को बहलाय, लकड़ सुंघा बुलवाई |
    लकड़ी दिया सुंघाय, आज कोयला हो जाता |
    छक्के अमृत-पान, सुबह से पीजा खाता ||

  2. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

  3. भूषण जी, आज आपकी पोस्ट ने दिल बाग बाग कर दिया… बोले तो गार्डन गार्डन

    @ ‘पुत्त जम्मेया सी गुड़ वंडिया सी’ (हिंदी:- पुत्र जन्मा था, गुड़ बाँटा था)

    नालायक को देख कर दूसरी बात भी कही जाती है :

    जम्मो पुत् ते वनडो कोले….. (पुत्र पैदा कर के कोयले बांटो) – इनके कारनामे ही ऐसे हैं.

  4. दीपक जी आपके बताए मुहावरे का अर्थ मौनी बाबा से पूछने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही है :)) अपना ग्राईं जो ठहरा.

  5. रविकर जी, आपकी कविता करने की भूख के हम सभी कायल हैं. थोड़े में इतना कहना कोई आपसे सीखे.

  6. आपका आभार.

  7. आभार यशवंत जी.

  8. एक यक्ष प्रश्न को कोई खबर नहीं…

  9. यह आधुनिक 'बीरबल' हैं। बिलकुल हाजिर जवाब।

  10. सदा says:

    बहुत सही कहा है आपने … बेहतरीन प्रस्‍तुति आभार

  11. बहुत ही बढ़िया कटाक्ष शानदार व्यङ्गात्म्क प्रस्तुति अंकल….क्या बात है, आज कल आप व्यंग बहुत बढ़िया लिखने लगे है। 🙂

  12. बिटिया यह ब्लॉग जगत के साथियों का ही प्रताप है.

  13. हा..हा..हा..

  14. आज 07/09/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की गया हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  15. बहुत सटीक कटाक्ष किया है भूषन जी..बढ़िया व्यंग है आज के हालात पर..आभार

  16. मीठा कटाक्ष
    रचना हँसने को मजबूर कर देती है

  17. आपकी तलवार की धार तीक्ष्णतर होती जा रही है। यह तलवार काटता,मारता और फटकारता भी है।

  18. G.N.SHAW says:

    सर जी आज कल कोलगेट पेस्ट के साथ फैल रही है | चोरी और सीना जोरी भी |

  19. दहाड़ेंगे … अपने मोनी बाबा जरूर दहाड़ेंगे … मेडम को वापस आने दो …

  20. यह सही है. मैडम को आने दो….. :))

  21. यह साथी ब्लॉगरों का ही प्रताप है महेंद्र जी.

  22. धन्यवाद आपका.

  23. आभार आपका यशोदा जी.

  24. क्या संयोग है. मैं कोच्ची में हूँ और एक भतीजे ने कोयले पर अधिक से अधिक जानकारी चाही थी. पोस्ट पढ़ लिया होता तो मामला आसान बन जाता. लगता है सबके दफ़न होने की घडी नजदीक आ रही है. सुन्दर पोस्ट.

  25. आपकी टिप्पणी एक राजनीतिक भविष्यवाणी की तरह है :))

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