History of Meghs is being consolidated – हो रहा है मेघ इतिहास का समेकन

राजस्थान के मेघ(वाल) लेखक इस सवाल के जवाबों के साथ उपस्थित हो गए हैं कि हमारे शासक पुरखे कौन थे. इतिहासकारों की खोज को उन्होंने अन्य लोगों तक छोटी और संक्षिप्त पुस्तकों के रूप में पहुँचाया है.

मेघों का इतिहास जानने के सिलसिले में मैंने पहली पुस्तक पढ़ी थी मेघमालाजिसे मेरे पिता भगत मुंशीराम ने लिखा था. फिर जानकारी में आया कि कई वर्ष पूर्व राजस्थान के स्वामी गोकुलदास ने इस विषय पर पुस्तक लिखी थी. फिर मैंने विकिपीडिया पर एक आलेख मेघवाल (”Meghwal”)पाया जो स्टब (stub) रूप में था. उसे विस्तार देते हुए कुछ खोजबीन की तो कई नई जानकारियाँ मिलीं जो उक्त आलेख में उपलब्ध हैं और संदर्भों सहित उपलब्ध हैं. विश्वास हो गया (विशेषकर जोशुआ प्रोजेक्ट की रिपोर्ट से) कि जम्मूकश्मीर के मेघ, राजस्थान के मेघवाल और गुजरात के मेघवार मूलतः एक ही हैं और मेघवंशी ही हैं और कि वे कर्नाटक तक फैले हैं. एक संदर्भ को मैं बचा कर नहीं रख सका कि उड़ीसा में मेघ ऋषि को अपना पुरखा मानने वाले लोग हैं.

इसके बाद राजस्थान के श्री आर.पी. सिंह, आईपीएस की पुस्तक मेघवंश : एक सिंहावलोकनमिली जिसे श्री सिंह को निवेदन करके मैंने मँगवाया था. कुछ माह पूर्व राजस्थान के ही श्री ताराराम की पुस्तक– ‘मेघवंश – इतिहास और संस्कृतिमुझे जेएनयू के प्रोफेसर डॉ.मूलाराम जी से प्राप्त हुई जिसे खराब स्वास्थ्य के कारण तब नहीं पढ़ पाया. आजकल देख रहा हूँ.

ऊपर जिन महानुभावों की पुस्तकों का ज़िक्र किया गया है उनमें से कोई भी इतिहासकार नहीं है लेकिन इन्होंने बहुत उपयोगी सामग्री दी है जो इतिहास में सम्मिलित है.

(अभी हाल ही में डॉ. एम.एल. परिहार ने ईमेल के ज़रिए से सूचित किया कि उनकी पुस्तक – ‘मेघवाल समाज का गौरवशाली इतिहासप्रकाशित हो चुकी है. इसकी समीक्षा पढ़ने का मौका मिला है. श्री परिहार ने फोन पर बताया कि उन्हें जम्मू में बसे मेघों की जानकारी MEGHnet से मिली थी. देखते हैं वह जानकारी पुस्तक में कैसी बन पड़ी है.)

इस बात का उल्लेख इसलिए किया है ताकि पाठकों को मालूम हो जाए कि राजस्थान में मेघ समाज, इतिहास और संस्कृति पर कार्य हो रहा है. पंजाब और जम्मू में भी कार्य हुआ है लेकिन उसकी मात्रा बहुत कम है. तथापि यह प्रमाणित होता है कि जानकार मेघजन गंभीरतापूर्वक इस दिशा में कार्य कर रहे हैं. पंजाब के डॉ. ध्यान सिंह का शोधग्रंथ ‘पंजाब में कबीरपंथ का उद्भव और विकास‘ के बहाने से जम्मू और पंजाब के मेघों का पिछले 200 वर्षों का इतिहास भी प्रस्तुत करता है. यह पढ़ने योग्य है.

प्राप्त जानकारी से यह भी पता चलता है कि जम्मू और पंजाब के मेघों के इतिहास की कड़ियाँ अभी जोड़ने की आवश्यकता है.
कई मेघ स्वयं को मेघऋषि की संतान मानते हैं और अपने अतीत को सूर्यवंश से जोड़ते हुए अपने उद्भव को राजपूतों से जोड़ते हैं. लेकिन अब यह निर्विवाद रूप से स्थापित हो चुका है कि राजपूतों के आविर्भाव से बहुत पहले ये मेघ भारत में शासक रह चुके हैं.

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5 Responses to History of Meghs is being consolidated – हो रहा है मेघ इतिहास का समेकन

  1. लेकिन अब यह निर्विवाद रूप से स्थापित हो चुका है कि राजपूतों के आविर्भाव से बहुत पहले ये मेघ भारत में शासक रह चुके हैं.इस विषय में और भी लिखिए यह एक नया पहलू है मेरे लिए, इसके इतिहास के विषय में और भी जानना चाहूंगी।

  2. कई मेघ स्वयं को मेघऋषि की संतान मानते हैंसहमत हूँ किसी बुक में भी पढ़ा है पर अभी याद नहीं आ रहा

  3. बहुत उपयोगी जानकारी …

  4. Mai Baba Shaheb Ambedkar ko Manta hu ki Unhi ki vajah hai Muje Acchi Padhai krne ka Mouka mila

  5. Hajariram Meghwal mokalsar says:

    Dhany h hum ki humare smaj ke ander aise Writer h jo ki humare smaj me jan chetna ka kaam kar rhe h. aur apni kalam ke dwara itihaas ko sjoye rakhne me apna sahyog de rhe h. Jai bheem

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