Messengers of Death – जमदूत

आम आदमी
सोचा था कि देश में संभावित गृहयुद्ध (Civil war) के बारे में लिखूँ जिसकी चेतावनी प्रशांत भूषण ने एक पत्रकार सम्मेलन में दी थी……..जो बन गई थी कल्पनाओं को चीरती हुई सनसनी……’ फिर विचार आया कि देश में स्मगल हो कर आ रहे और सरकारी नीतियों के तहत बँट रहे फायर आर्म्स पर कलम की एके-47 चला दूँ (मेरे पास केवल यही है). लेकिन मैं डर गया. इसलिए कबीर वाणी याद कर के अपने उर को शांत कर रहा हूँ.

‘….जम के दूत बड़े मरदूद……’ 

आम आदमी हथियार बाँटने वालों से क्या कहे सिवाय इसके कि– ”एकदम सामने तो आप ही हो भगवन्!आप ही पूछते हो कि घूँसा पास है या भगवान!! आप सामने हो तो भगवान के पास पहुँचने में कितना समय लगता है?”

Advertisements

About meghnet

Born on January, 13, 1951. I love my community and country.
This entry was posted in रचनात्मक. Bookmark the permalink.

4 Responses to Messengers of Death – जमदूत

  1. रब नेड़े की घसुन्न … पर कलम जरूर चलाइए नहीं तो इतिहास को जवाब देना भारी न हो जाए …

  2. घसुन्न ही होता है सर जी.

  3. घूँसा पास है या भगवान ? लिखिए न , आपको पढ़ना अच्छा लगता है..

  4. आर्म्‍स बनाम हार्म्‍स के बीच फंसा जनमानस।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s