Human point of view of an Asur (Asura) – असुर का मानवीय दृष्टिकोण

यह पोस्ट रिकार्ड के लिए रखी गई है.
प्रेस-कॉन्फ्रेंस/28 सितंबर 2013
सुषमा असुर ने आज झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपील की है कि दुर्गा पूजा के नाम पर असुरों की हत्या का उत्सव बंद होना चाहिए. असुर आदिम आदिवासी समुदाय की युवा लेखिका सुषमा ने कहा कि महिषासुर और रावण जैसे नायक असुर ही नहीं बल्कि भारत के समस्त आदिवासी समुदायों के गौरव हैं. वेद-पुराणों और भारत के ब्राह्मण ग्रंथों में आदिवासी समुदायों को खल चरित्र के रूप में पेश किया गया है जो सरासर गलत है. हमारे आदिवासी समाज में लिखने का चलन नहीं था इसलिए ऐसे झूठे, नस्लीय और घृणा फैलाने वाली किताबों के खिलाफ चुप्पी की जो बात फैलायी गयी है, वह भी मनगढंत है. आदिवासी समाज ने हमेशा हर तरह के भेदभाव और शोषण का प्रतिकार किया है. असुर, मुण्डा और संताल आदिवासी समाज में ऐसी कई परंपराएं और वाचिक कथाएँ हैं जिनमें हमारा विरोध परंपरागत रूप से दर्ज है. चूँकि गैर-आदिवासी समाज हमारी आदिवासी भाषाएँ नहीं जानता है इसलिए उसे लगता है कि हम हिंदू मिथकों और उनकी नस्लीय भेदभाव वाली कहानियों के खिलाफ नहीं हैं.
झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा की सुषमा असुर ने कहा कि असुरों की हत्या का धार्मिक परब मनाना देश और इस सभ्य समाज के लिए शर्म की बात होनी चाहिए. सुषमा ने कहा कि देश के असुर समाज अब इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगा. उन्होंने जेएनयू दिल्ली, पटना और पश्चिम बंगाल में आयोजित हो रहे महिषासुर शहादत दिवस आयोजनों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की और असुर सम्मान के लिए संघर्ष को जारी रखने का आह्वान किया. सुषमा ने कहा कि वह सभी आयोजनों में उपस्थित नहीं हो सकती हैं पर आयोजकों को वह अपनी शुभकामनाएँ भेजती हैं और उनके साथ एकजुटता प्रदर्शित करती हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखड़ा की महासचिव वंदना टेटे भी उपस्थित थीं. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के कत्लेआम को आज भी सत्ता एक उत्सव की तरह आयोजित करती है. रावण दहन और दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों के पीछे भी एक भेदभाव और नस्लीय पूर्वाग्रह की मनोवृत्ति है.
सुषमा असुर
वंदना टेटे
झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा.
साभार …!!!
सुषमा जी के इस बयां पर मीडिया चुप क्यों है ?? कहीं कोई बहस नहीं, चर्चा नहीं ?? क्या सुषमा जी की इस मुहिम को समस्त मूलनिवासियों द्वारा समर्थन मिलना चाहिए ?? इस ऐतिहासिक सत्य और खुलासे पर आपके क्या विचार हैं ????
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One Response to Human point of view of an Asur (Asura) – असुर का मानवीय दृष्टिकोण

  1. अभिजात्यों की मीडिया ऐसे ही मुँह नहीं खोलती है..

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