Monthly Archives: December 2013

The reality of riots – दंगों का सच

दंगों का कारण कभी भी केवल धार्मिक और आर्थिक नहीं रहा. इनका संबंध सत्ता से रहा है और अब लोकतंत्र में सीधे तौर पर वोटों की गिनती के साथ है. कोशिश होती है कि दंगे कर के दलितों और दलितों … Continue reading

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Bhagata Sadh – भगता साध

As revealed by the history of famines during the 19TH century, because of hunger and tormenting poverty, many people among the communities like Meghs had even started eating the flesh of animals, dead or otherwise. Hunger also compelled them to … Continue reading

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Faith is eventually lost – विश्वास अंततः टूटता है

मैंने विश्वास की शक्ति को महसूस किया है. वह ‘भगवान’ की है या नहीं मैं नहीं जानता. मैं कई बार ऐसे लोगों के बारे में सोचता हूँ जिन्होंने कभी ‘भगवान’ (God) शब्द नहीं सुना. कई देश ऐसे हैं जहाँ गॉड … Continue reading

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Eklavya – एकलव्य का मिथ

हालात से ऐसा लगता है कि पांडवों और द्रोणाचार्य ने मिल कर एकलव्य का अंगूठा काटा था. 

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भगवान आपको देख लेगा

ईश्वर और बिजली के बारे में लोगों से पूछिए. ईश्वर के होने की संभावना के बारे में कोई कहेगा 90%, कोई 50%, कोई 20%, कोई 10% आदि. बिजली के होने के बारे में 99.9% लोग ‘हाँ’ कहेंगे. अब आपके ज्ञान … Continue reading

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AAP – आम आदमी पार्टी

मुलायम का तीसरा मोर्चा दलितों के समर्थन के बिना अपंग ही रहेगा क्योंकि वहाँ अन्य सहयोगी पार्टियों का नेतृत्व ब्राह्मणों के हाथों में है. जल्द ही मीडिया आम आदमी पार्टी को तीसरा मोर्चा कहने लगेगा जो ब्राह्मण–बनिया जुगलबंदी है. आम … Continue reading

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Balli Singh Cheema – बल्ली सिंह चीमा

ग़ज़ल के क्षेत्र में यह एक सशक्त हस्ताक्षर दिखा है. शायद मैं ही इसे देखने में लेट हूँ. आप इसका आनंद लीजिए. यूँ मिला आज वो मुझसे कि ख़फ़ा हो जैसेमैंने महसूस किया मेरी ख़ता हो जैसे तुम मिले हो … Continue reading

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