Category Archives: ग़ज़ल

ये दौर

लफ़्ज़ों की काट-छाँट में उन्वान1 मर गया अब क्या कहूँ चमकता चेहरा किधर गया अंधे शहर के लोग ख़फ़ा उससे हो गए दीवानावार वो लिए दीपक जिधर गया उस-उस तरफ़ के लोग भी सूखे से फट गए सियासी स्याह बादल … Continue reading

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