Category Archives: धर्म

His Holiness Swami Bapu Baba – पूज्य स्वामी बापू बाबा

सोचता हूँ कि मैं ब्लॉगर न होता तो स्वनामधन्य बाबा होता. सैंकड़ों फॉलोअर नहीं बल्कि लाखों चेले होते. बहुत से कमेंट नहीं, बहुत से नोट होते. चप्…चप्… आजकल बहुत से बाबा टीवी पर हैं. मोटी रकम बनती है. इनमें से … Continue reading

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Beyond the principles of profession – धंधे के उसूलों से परे

15-20 दिन पहले मैंने एक निर्मल बाबा को अपने सोशल नेटवर्क अकाऊँट से बाहर किया था. पता नहीं वह कौन था. लेकिन आजकल एक निर्मल बाबा चर्चा में हैं. अस्तु. बाबा लोगों का कारोबार मूलतः ‘चर्चा’ से चलता है. लोग … Continue reading

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Waging war against nation- diluting definition – टलना फाँसी का बनाम राष्ट्र पर हमला

कानून का विशेषज्ञ नहीं हूँ लेकिन भारत के एक नागरिक को राष्ट्र पर हमले की परिभाषा के बारे में जो जानना चाहिए उसके बारे में जो जानता हूँ उसके आधार पर कुछ कहने का अधिकार है. किसी सरकारी सेवक या … Continue reading

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Religious processions: a menace – धार्मिक जुलूस : एक मुसीबत

हाल ही में संपन्न चुनावों में एक अच्छी बात थी कि वातावरण काफी हद तक प्रदूषण से बच गया. दीवारों आदि के चेहरे पोस्टरों से बदनुमा होने से बच गए. इस बार राजनीति के भोंपुओं और लाऊडस्पीकरों की मुसीबत बहुत … Continue reading

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Meghs of Punjab and Arya Samaj – पंजाब के मेघ भगत और आर्य समाज

स्यालकोट से विस्थापित हो कर आए मेघवंशी, जो स्वयं को भगत भी कहते हैं, आर्यसमाज द्वारा इनकी शिक्षा के लिए किए गए कार्य से अक़सर बहुत भावुक हो जाते हैं. प्रथमतः मैं उनसे सहमत हूँ. आर्यसमाज ने ही सबसे पहले … Continue reading

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Why religious places, why not education – धार्मिक जगह क्यों, शिक्षा क्यों नहीं

भारत के जातिवाद की शिकार ग़रीब जातियों को धर्म ने भी शोषित किया है. धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाज़ इनके हाथों से धन खीचते रहते हैं. इसके लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं, जैसे 1. यह प्रचार कि धार्मिक स्थल पर … Continue reading

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Baba Faqir Chand – Key to Religion

People are running from place to place in search of happiness and peace. Make a sincere search for your ideal within you. Enjoy the bliss after finding your ideal from within. This is the teaching of Santmat. Why you run … Continue reading

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