Category Archives: रचनात्मक

Messengers of Death – जमदूत

आम आदमी सोचा था कि देश में संभावित गृहयुद्ध (Civil war) के बारे में लिखूँ जिसकी चेतावनी प्रशांत भूषण ने एक पत्रकार सम्मेलन में दी थी……..जो बन गई थी ‘कल्पनाओं को चीरती हुई सनसनी……’ फिर विचार आया कि देश में … Continue reading

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Coal, lion and Baba – कोयला, सिंह और बाबा

कोल ब्लॉ(ग)क  🙂 भारत के कोयले में आग लगी है और धुँआ अमेरिका तक चला गया है. ‘कोयले की दलाली में मुँह काला’. यह मुहावरा उतना ही पुराना है जितनी इस क्षेत्र की खुदाई, आबंटन और दलाली. जिस महिला ने … Continue reading

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ये दौर

लफ़्ज़ों की काट-छाँट में उन्वान1 मर गया अब क्या कहूँ चमकता चेहरा किधर गया अंधे शहर के लोग ख़फ़ा उससे हो गए दीवानावार वो लिए दीपक जिधर गया उस-उस तरफ़ के लोग भी सूखे से फट गए सियासी स्याह बादल … Continue reading

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Genius Kishore Kumar– प्रतिभावान किशोर कुमार

दो दिन पहले किशोर कुमार का जन्मदिन था. टीवी चैनल बता रहे थे कि किशोर कुमार जीनियस गायक था. थोड़ी देर के बाद यह भी बताया गया कि उसकी कंजूसी की आदत और रात भर पैसे गिनने की आदत के … Continue reading

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Dorothy! Are you fine? – तुम ठीक तो हो डोरोथी?

मेरा विचार है कि ब्लॉग जगत के कई ब्लॉगर अभी तक डोरोथी को नहीं भूले होंगे जो Mute Canvas और अग्निपाखी ब्लॉग लिखती थी. हिंदी और अंग्रेज़ी की बहुत अच्छी जानकार थी. उसने ब्लॉगर पर अपना परिचय इन शब्दों में … Continue reading

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Morning walk – evening walk – प्रातः की सैर – शाम की सैर

कई वर्ष से मैंने सुबह की सैर बंद कर दी है. शाम की सैर अच्छी लगती है. सुबह अपने तरीके से जीओ, शाम को अपनी सुविधा से सैर करो. सुबह की सैर का अर्थ है ‘हाँफती हुई मोटी-मोटी लड़कियाँ और … Continue reading

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Dara Singh – Pride of Punjab – दारा सिंह – पंजाब का गौरव

इन दिनों भारत के प्रसिद्ध रुस्तम-ए-हिंद, रुस्तम-ए-ज़मां (World Champion) और अभिनेता दारा सिंह की तबीयत खराब है. इनके जीवन के बारे में अधिक नहीं जानता लेकिन जितना इन्हें सामने या फिल्मों में देखा है उतना लिख रहा हूँ. छह-सात वर्ष … Continue reading

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