Eklavya – एकलव्य का मिथ

हालात से ऐसा लगता है कि पांडवों और द्रोणाचार्य ने मिल कर एकलव्य का अंगूठा काटा था. 
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भगवान आपको देख लेगा

ईश्वर और बिजली के बारे में लोगों से पूछिए. ईश्वर के होने की संभावना के बारे में कोई कहेगा 90%, कोई 50%, कोई 20%, कोई 10% आदि. बिजली के होने के बारे में 99.9% लोग ‘हाँ’ कहेंगे. अब आपके ज्ञान चक्षु के अनुसार किसके होने की संभावनाएँ अधिक हैं
ब्रायन हाइन्स (Brian Hines) के ब्लॉग ‘चर्च ऑफ द चर्चलेस’ से प्रेरित.

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AAP – आम आदमी पार्टी

मुलायम का तीसरा मोर्चा दलितों के समर्थन के बिना अपंग ही रहेगा क्योंकि वहाँ अन्य सहयोगी पार्टियों का नेतृत्व ब्राह्मणों के हाथों में है. जल्द ही मीडिया आम आदमी पार्टी को तीसरा मोर्चा कहने लगेगा जो ब्राह्मणबनिया जुगलबंदी है.
आम आदमी पार्टी कांग्रेस और भाजपा की ऐसी शाखा है जो संविधान के साथ बड़ी छेड़छाड़ के लिए बनाई गई है. सावधान रहने की आवश्यकता होगी. जागो मूलनिवासी.

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Balli Singh Cheema – बल्ली सिंह चीमा

ग़ज़ल के क्षेत्र में यह एक सशक्त हस्ताक्षर दिखा है. शायद मैं ही इसे देखने में लेट हूँ. आप इसका आनंद लीजिए.

यूँ मिला आज वो मुझसे कि ख़फ़ा हो जैसे
मैंने महसूस किया मेरी ख़ता हो जैसे

तुम मिले हो तो ये दर-दर पे भटकना छूटा
एक बेकार को कुछ काम मिला हो जैसे

ज़िंदगी छोड़ के जायेगी न जीने देगी
मैंने इसका कोई नुकसान किया हो जैसे

वो तो आदेश पे आदेश दिये  जाता है
सिर्फ़ मेरा नहीं दुनिया का ख़ुदा हो जैसे

तेरे होठों पे मेरा नाम ख़ुदा ख़ैर करे
एक मस्जिद पे श्रीराम लिखा हो जैसे

मेरे कानों में बजी प्यार भरी धुन बल्ली
उसने हौले से मेरा नाम लिया हो जैसे

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The Koris – कोरी

कोरी जाति के बारे में विकिपीडिया पर एक आलेख उपलब्ध है जिसे मैंने हाल ही में (शायद दोबारा) देखा है. रुचिकर है. इस आलेख को और कोली तथा मेघवाल आलेख को मिला कर पढ़ें तो काफी स्पष्ट हो जाता है कि ये तीनों जातियों में कोई अंतर नहीं है. और भी जानकारी वहाँ मिलेगी.
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Whom do you feed – आप किसे पुष्ट करते हैं

एक वृद्ध मेक्सिकन इंडियन ने अपने पोते को एक कथा सुनाईहर इंसान में दो भेड़िये होते हैंएक अच्छा होता हैएक बुराजो बुरा होता है वो गफलत में रहने वालाक्रोधीअहंकारीदूसरों को धोखा देने वालाझूठ पर पलने और फलने वाला होता हैदूसरा भेड़िया अच्छा वाला होता हैमित्रता पूर्ण व्यवहार वालासत्य पर चलने वालान्यायप्रियशांतधीरगंभीरसबको साथ ले के चलने वाला और सबको प्यार करने वालाहर इंसान में ये दोनों भेड़िये होते हैं.
पोता बोला – फिर तो दोनों लड़ते होंगे?
दादा बोला – हाँ लड़ते तो हैं.
पोता बोला – जीतता कौन है?

दादा हँसते हुए बोला – हा हा हा वही जीतता है जिसको तुम भोजन खिलाते हो.

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Meghs of J&K-2

जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश और पजाब के कई भूभाग सन 1900 के आस पास chamba state में शामिल थे। रावी और चंद्रभागा नदियों के कारण यह महतवपूर्ण क्षेत्र था। उन्नीसवी शदी के अंत में अंग्रेजों ने इस भूभाग का विस्तृत सर्वे और अनुसन्धान किया जिसे गजेतिअर ऑफ़ चाम्बा के नाम से 1910 में प्रकाशित किया। सैमुएल टी वेस्टन द्वारा सम्पादित इस गजेटियर में इन इलाको में निवासित लोगों के रहन सहन रीतिरिवाज खानपान व्यवसाय और इतिहास आदि पर महतवपूर्ण सामग्री है। पंजाब जे के आदि क्षेत्रों में निवास करने वाले मेघ समुदाय पर उपलब्द्ध सूचना संक्षेप में निम्न प्रकार है-
To Satish Bhagat.यहाँ पर आपको सैम्युल टी वेस्टन के ‘मेघ इतिहास’ के बारे में व्यक्त मत का अनुवाद दे रहा हूँ। कृपया संग्रहित करें। जम्मू कश्मीर में ज्यादातर मेघ आबादी पर्वतीय क्षेत्रो में रहती है। ये वर्त्तमान में पर्वतों पर नहीं बसे हैं बल्कि जब से पहाड़ी क्षेत्रों में बस्तियां बसने लगी तभी से आबाद हैं। आज ये एक जाति के रूप में जाने जाते हैं। सैमुअल टी वेस्टन लिखते हैं- “पर्वतों पर रहने वाले ये लोग मूलतः कौन थे? इस बारे में अत्यल्प जानकारी भी उपलब्ध नहीं है; जो इस बारे में हमारी मदद कर सके। परम्परागत मान्यता है कि ये लोग मैदानी इलाकों से आकर यहाँ बसे हैं। जहाँ सब कुछ अनिश्चित है; जहाँ कोई अनुमान की जोखिम उठाता तो यह असम्भाव्य नहीं लगता है कि वर्त्तमान में जो मेघ आदि जातियां हैं वे लोग ही यहाँ के आदि (मूल) निवासी हैं।——–इनकी आबादी एक चौथाई है। जो कोली—-मेघ और कुछ अन्य में परिगणित है। यद्यपि वे सामाजिक स्तरीकरण में अलग अलग हैं परन्तु हिन्दुओं द्वारा उन्हें बहिष्कृत (जाति बाह्य) ही माना जाता है। इन लोगों के पास अपने मूल निवास की कोई इतिहास-परंपरा भी नहीं है। जो इस अनुमान को पुष्ट करता है कि उनको यहाँ निवास करते हुए लम्बा काल गुजर चुका है। जनरल कन्निन्घम आश्वस्त है कि किसी समय पश्चिमी हिमालय क्षेत्र मध्य भारत में बसने वाले कोल प्रजाति के समान मानव समुहों द्वारा ही आबाद था। आज भी ये बहुतायत लोग है; जो कोल; मेघ नाम धारण करते है । ये वही लोग हैं।” पूर्वोक्त पृष्ठ 58
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