Fore ordeal – अग्निपरीक्षा

पुरातन काल में अग्निपरीक्षा में केवल स्त्रियों को ही बैठने की अनुमति होती थी. यदि वो पास हो जाती तो भी कई बार राजा उसे सज़ा देता और राज्य से निकाल देता था. तब राजा के अति बुद्धिमान संकटमोचक सेवक हमेशा के लिए मौनव्रत धारण कर लेते थे. How sweet!

अब आधुनिक काल में जिन बच्चों को होलिका जलाने की खुशी भरी आदत है उनकी दहेज हत्यानामक नाटक की रिहर्सल बचपन में ही हो जाती है. How sweet!

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2014 in review

The WordPress.com stats helper monkeys prepared a 2014 annual report for this blog.

Here’s an excerpt:

A New York City subway train holds 1,200 people. This blog was viewed about 6,800 times in 2014. If it were a NYC subway train, it would take about 6 trips to carry that many people.

Click here to see the complete report.

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BJP and Meghs – बीजेपी और मेघ

बीजेपी का दलित दाँव

आज सभी समाचारिया चैनल उदित राज (बुद्धिस्टऔर रामविलास पासवान (दुसाधऔर रामदास अठावले (बुद्धिस्ट), अध्यक्षरिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के बीजेपी में जाने की खबरों से अटे पड़े हैं.

पासवान कभी पायदार सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैंकेंद्र में मंत्री भी रह चुके हैंउनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी हैआजकल उनकी छवि मौकापरस्त राजनेता की हैउदितराज का नाम पहले रामराज थासंभवतः अंबेडकरवाद से प्रभावित हो कर उन्होंने अपना नाम उदितराज कर लियादिल्ली में काफी सक्रिय रहे हैंउनकी इंडियन जस्टिस पार्टी‘ नाम से एक राजनीतिक पार्टी भी हैदक्षिण भारत की कुछ दलित संस्थाओं में उनकी अच्छी घुसपैठ हैएक बार उनसे फोन पर बात करने का सुअवसर प्राप्त हुआ थाकाफी खनखनाती आवाज़ में टू द प्वाइंट बोलते हैं.

बीजेपी ने काफी समय से ओबीसी को जानेअनजाने में अपने पसंदीदा टारगेट पर रखा हैउमा भारती, (शायदगोविंदाचार्य (भी), नरेंद्र मोदी नामक ओबीसी पत्ते उसके पास रहे हैंपंजाब में एक वर्तमान मंत्री श्री चूनी लाल भगत को कुछ प्रोमोट किया हैइसी प्रकार राजस्थान और जम्मूकश्मीर के मेघों में भी बीजेपी की बिजली चमकी हैराजस्थान में कैलाश मेघवाल विधानसभा के अध्यक्ष हैं केंद्र में एनडीए की पिछली सरकार में अर्जुन मेघवाल एक महत्वपूर्ण चेहरा बने हैं.

 मेघवंशियों और बीजेपी पर मैंने मेघनेट पर एक पोस्ट लिखी थीनीचे दिए उसके लिंक पर आप कुछ जानकारी ले सकते हैंमैं अपनी खोपड़ी के खाँचे के अनुसार पासवान और उदितराज को मेघवंशी मानता हूँ.

 ख़ैरहर पार्टी दलित कार्ड खेलती है और हर दलित नेता के हाथ में 4-5 पार्टियों के पत्ते होते हैंदेखा यह है कि दलितों का थर्मामीटर राजनीतिक समझदारी का तापमान कम और आपसी अनेकता का तापमान अधिक दिखाता हैदाँव पर ख़ुद जनता होती है.

 

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Hindutva and Manusmriti – हिंदुत्व और मनुस्मृति

जहाँ तक ‘हिंदू’ शब्द का सवाल है यह शब्द दलितों के लिए जात-पात का बुरा संकेत है और ब्राह्मणों के लिए ‘मनुस्मृति’ को जारी रखने का खुशी भरा एक संकेत. एक मान्य-सी परिभाषा के अनुसार ‘हिंदू वह है जो वेदों में आस्था रखता है’ – यहाँ तक तो चलेगा (हालाँकि मैं इसे नहीं मानता) लेकिन मनुस्मृति को हिंदुओं का धर्मग्रंथ मानने में दलितों और शूद्रों को केवल आपत्ति ही हो सकती है. आजकल भारत में जिस ‘हिंदूराष्ट्र’ को बनाने की कवायद हो रही है उसमें ‘मनुस्मृति’ का अहि-नाग पहले ही कुंडली मारे बैठा है.
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The reality of riots – दंगों का सच

दंगों का कारण कभी भी केवल धार्मिक और आर्थिक नहीं रहा. इनका संबंध सत्ता से रहा है और अब लोकतंत्र में सीधे तौर पर वोटों की गिनती के साथ है. कोशिश होती है कि दंगे कर के दलितों और दलितों से धर्मांतरित हुए मुस्लिमों को पहले से गरीब कर दिया जाए और बाद में पुनर्वास के नाम पर उन्हें उनके वोट क्षेत्र से दूर ले जाकर बसाया जाए ताकि उनके वोटों में एकता न हो जाए.

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Bhagata Sadh – भगता साध

As revealed by the history of famines during the 19TH century, because of hunger and tormenting poverty, many people among the communities like Meghs had even started eating the flesh of animals, dead or otherwise. Hunger also compelled them to eat the left-over food of both the Muslims and Hindus. However, Basith and Dhian (sub-castes among Meghs in Jammu province) did not develop such habits. Because of this reason, they started keeping aloof from the other Meghs or Mihnghs. 

 However, the issue was resolved through the efforts of Baba Bhagata Sadh r/o Vill. Khairi, Dist. Jammu, who later on came to be known as ‘Guru of Keran’. Consequently, by a contract which was concluded and signed in 1879, through the influence of a ‘Guru of Keran’, the representatives of Meghs hailing from different areas pledged themselves to total abstinence from it. A breach of this agreement made a man liable to pay Rs. 25 to the Government, Rs. 5 to the headmen of village, and a sum, fixed according to the means of the offender, as a penalty was to be paid to the brotherhood (Biradari). In default of payment, he was liable to exclusion from the caste. This contract did have a good impact over the people and since then the Meghs have generally believed in vegetarian food habits.


(यह सूचना श्री रतन गोत्रा जी के एक आलेख Meghs of India से मिली है. यह भी सुनने में आया है कि भगता साध के अनुयायी आज उनकी जीवन-कथा के साथ कुछ चमत्कारों के जुड़ने की बातें भी बताते हैं.)

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Faith is eventually lost – विश्वास अंततः टूटता है

मैंने विश्वास की शक्ति को महसूस किया है. वह ‘भगवान’ की है या नहीं मैं नहीं जानता. मैं कई बार ऐसे लोगों के बारे में सोचता हूँ जिन्होंने कभी ‘भगवान’ (God) शब्द नहीं सुना. कई देश ऐसे हैं जहाँ गॉड शब्द का महत्व नहीं है. वहाँ के लोगों की इच्छाएँ भी पूरी होती हैं. वे भी प्रगति करते हैं. मज़बूत हैं. कई तो ईश्वर को मानने वालों से अधिक मज़बूत हैं और सुखी हैं. यह आत्मविश्वास और सही सोच की वजह से है.
एक और तथ्य भी है कि जब कोई व्यक्ति शारीरिक या मानसिक रूप से कमज़ोर या बीमार हो जाता है तो उसे एक सहारा दरकार होता है जिसे वह भगवान, डॉक्टर, दवाई, नज़दीकी रिश्तेदार, गुरु, आदि में ढूँढता है और उसे पाता हुआ महसूस करता है. इसे विश्वास की शक्ति भी कह सकते हैं.
कुछ लोग एक के बाद एक देवता पर विश्वास करते हैं या कई देवताओं को पूजते हैं. इसका कारण मैं यह समझता हूँ कि उनका विश्वास एक जगह से हट कर दूसरी जगह आरोपित होता है. इससे भी प्रमाणित होता है कि विश्वास (चाहे वह ईश्वर पर ही क्यों न हो) अंततः टूटने वाली चीज़ है.
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